चरखी दादरी। लंबा समय बीतने के बाद भी दादरी सिविल अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हुई है। इसके चलते जिले के मरीज काउंसिलिंग के लिए रोहतक और गुरुग्राम जाकर उपचार लेने को विवश हैं। पिछले दो साल में जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संदर्भ में निदेशालय को नौ डिमांड भेजी गई हैं, लेकिन अब तक नतीजा सिफर है। इस समय जिले में मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती की सख्त जरूरत है।
जिले की आबादी करीब साढ़े छह लाख है। शहर में सिविल अस्पताल और मातृ-शिशु अस्पताल है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 35 उप-स्वास्थ्य केंद्र हैं। दादरी के जिले बनने के 6 साल बाद सिविल अस्पताल में जिला स्तरीय उपचार मरीजों को नहीं मिल रहा। मनोरोग विशेषज्ञ की कमी इसकी बानगी भर है।
मौजूदा समय में तनाव मनुष्यों पर भारी है। ऐसे में मनोरोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। सिविल अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीज यहां आने के बजाय सीधे रोहतक पीजीआई और गुरुग्राम के निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं। पीजीआई में मरीजों की भीड़ के चलते ज्यादातर मरीजों के तीमारदार निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें वहां पर महंगे उपचार के लिए जेबी ढीली करनी पड़ रही है।
- 600 है सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी
दादरी सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी करीब 600 रहती है। चार साल पहले से तुलना करे तो दैनिक ओपीडी करीब 25 फीसदी बढ़ी है। दूसरी ओर सरकार जिले को मेडिकल ऑफिसर देने में तो कामयाब रही है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी अब तक दूर नहीं हो पाई है।
- इन विशेषज्ञों के पद पड़े हैं खाली
दादरी सिविल अस्पताल की बात करे तो विशेषज्ञों के दस से अधिक पद खाली हैं। इनमें अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेष और फिजिशियन अहम है। लंबे समय से ये पद खाली हैं और इसके चलते जिला स्तरीय कई सेवाएं प्रभावित हैं। इनका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए सरकार को डिमांड भेज चुके हैं। जिले में मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती होते ही ओपीडी शुरू कर दी जाएगी।
-डॉ. कृष्ण कुमार, सीएमओ, चरखी दादरी