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Charkhi Dadri News: बाल रोग विशेषज्ञ की कमी नहीं हुई दूर, मरीज रोहतक-हिसार जाने के मजबूर

Fri, 01 Aug 2025 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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फोटो 23
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दादरी मातृ-शिशु अस्पताल की एसएनसीयू में नवजात के लिए रखीं मशीनें। संवाद
- दादरी स्वास्थ्य विभाग के पास इस समय नहीं है एक भी बाल रोग विशेषज्ञ, डेढ़ साल से खाली पड़ा पद, मुख्यालय बार-बार मांग भेजने के बाद भी तैनाती नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दादरी स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो पा रही। इस समय बाल रोग विशेषज्ञ की कमी सबसे अधिक खल रही है। करीब डेढ़ साल बाद भी अस्पताल में विशेषज्ञ का पद खाली पड़ा है। माता-पिता उपचार के लिए बच्चों को रोहतक और हिसार ले जाने के लिए विवश हैं। वहीं, डेढ़ साल में 5 मांग भेजने के बाद भी मुख्यालय की ओर से तैनाती नहीं की गई है।
फिलहाल, प्रदेश के 22 जिलों में से दो में ही मातृ-शिशु अस्पताल हैं। दादरी इनमें से एक है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों से जुड़ीं तमाम स्वास्थ्य सेवाएं नागरिक अस्पताल से मातृ-शिशु अस्पताल में शिफ्ट हुए 5 माह बीत चुके हैं, लेकिन, अब तक यहां बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो पाई है।
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एमसीएच में जच्चा-बच्चा के लिए तमाम स्वास्थ्य सेवाएं एक ही छत के नीचे हैं। यह दावा स्वास्थ्य विभाग का रहा है। दूसरी ओर, हकीकत यह है कि इस अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती ही नहीं है। लाखों की मशीनें शोपीस बनकर रह गई हैं।
दूसरी ओर विशेषज्ञ की कमी से जन्मजात गंभीर बीमारियों से ग्रस्त शिशुओं को रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। प्रतिमाह ऐसे 7 से 10 केस रेफर किए जा रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ जैसी मूलभूत सुविधा सरकार 5 माह बाद भी मुहैया नहीं करवा पाई है। स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. विरेंद्र यादव यहां जच्चा-बच्चा की तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे शुरू करने का दावा करके गए थे। लेकिन, अब तक यहां बाल रोग विशेषज्ञ नहीं भेजा गया है। मातृ-शिशु अस्पताल में उपचार करवाने आए मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से जल्द बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती करवाने की मांग की है।
- लेबर रूम और एसएनसीयू की गई है शिफ्ट

दरअसल, सरदार झाड़ू सिंह चौक समीप स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में लगभग 5 माह पहले ही नागरिक अस्पताल से लेबर रूम और एसएनसीयू यूनिट शिफ्ट की गई थी। वहां तैनात स्टाफ भी यहां लाया गया था। दूसरी ओर जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। इससे बच्चों के उपचार के लिए अभिभावकों को दूसरे जिलों की खाक छाननी पड़ रही है।

- प्रतिमाह होती हैं 85 से अधिक डिलीवरी

मातृ-शिशु अस्पताल के लेबर रूम में प्रतिमाह करीब 85 डिलीवरी होती हैं। इनमें 7-8 बच्चों की प्री-मेच्योर डिलीवरी होती है। इससे उन्हें रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है। ठीक होने तक माता-पिता को वहीं रुकना पड़ता है, जो आसान नहीं है।


- इन मामलों में किए जाते हैं शिशु रेफर

स्वास्थ्य विभाग की ओर से महिलाओं और बच्चों से जुड़ीं तमाम सेवाएं एक ही छत के नीचे देने के लिए डिलीवरी रूम और एसएनसीयू एमसीएच में लाया गया था। विशेषज्ञ की कमी से नवजात शिशु रेफर करने का सिलसिला नहीं रुक रहा है। समय से पूर्व जन्मे बच्चे, श्वसन तंत्र विकार, निम्न ब्लड शुगर, गंभीर संक्रमण, हृदय की कम धड़कन, मेटाबॉलिक विकार, कम वजन आदि जन्मजात दोष के मामलों में शिशुओं को रेफर किया जाता है।
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वर्सन
बाल रोग विशेषज्ञ की मांग हमने मुख्यालय भेजी हुई है जबकि अपने स्तर पर विशेषज्ञ हायर करने का प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही जिले को विशेषज्ञ मिलने की उम्मीद है। उसके बाद समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।

-डॉ. जितेंद्र सिंह, सीएमओ, दादरी स्वास्थ्य विभाग
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