अनाज मंडी परिसर में नमी कम करने के लिए बिछाई गई धान की उपज।
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चरखी दादरी। धान बेचने के लिए दूर-दराज की मंडियों के चक्कर लगाने वाले जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे जिलों की मंडियों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
सरकार की ओर से मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज धान का आंकड़ा अन्य जिलों में नहीं दिखाए जाने के कारण जिले के किसान स्थानीय मंडियों में ही सरकारी भाव पर अपनी उपज बेच सकेंगे। इससे किसानों का समय और परिवहन खर्च बचेगा तथा धान बेचने के लिए दूर जाने की परेशानी से भी छुटकारा मिलेगा।
जानकारी अनुसार जिले में करीब 100 एकड़ जमीन पर पीआर धान की फसल उगाई गई है। मार्केट कमेटी की ओर से सरकार द्वारा निर्धारित 2441 से 2446 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर धान की खरीद की जाएगी। स्थानीय मंडियों में खरीद की सुविधा मिलने से किसानों को अपनी फसल लेकर दूसरे जिलों में जाने की जरूरत नहीं रहेगी। वहीं मंडी में गेटपास काटने के लिए बंद किए गए दूसरे गेट को भी खोल दिया गया है जिससे किसानों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
पहले धान की उपज बेचने के लिए किसानों को दूरदराज स्थित दूसरी मंडियों का रुख करना पड़ता था। इसके चलते उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। धान को मंडी तक पहुंचाने में परिवहन खर्च बढ़ने के साथ ही समय भी अधिक लगता था। मंडियों में पहुंचने के बाद खरीद की प्रक्रिया पूरी होने तक किसानों को इंतजार भी करना पड़ सकता था।
अब स्थानीय मंडियों में सरकारी भाव पर धान बेचने की सुविधा मिलने से किसानों को इन परेशानियों से राहत मिलेगी। किसान अपनी उपज को नजदीकी मंडी में ले जाकर बिक्री की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे ढुलाई का खर्च कम करने में मदद मिलेगी।