13 साल के चुनावी इतिहास में दादरी और बाढड़ा हलके से एक-एक बार ही निर्दलीय को विधानसभा में जाने का मिला है मौका
रबिन वर्मा
चरखी दादरी। जिले में दोनों हलकों की जनता ने चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। अब तक दोनों हलकों से केवल एक-एक निर्दलीय प्रत्याशी ही चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचा है। 11 चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशियों को हार झेलनी पड़ी है।
बाढड़ा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने वर्ष 1967 में निर्दलीय उम्मीदवार को विधायक चुना था। विधानसभा क्षेत्र का पहला चुनाव अजीत सिंह ने निर्दलीय लड़ा था। इस चुनाव में चंद्रावती उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी रही थीं। उस चुनाव में 42,028 मतदाताओं ने मतदान किया था। अजीत सिंह को 15,002 जबकि चंद्रावती को 9,635 वोट मिले थे। अजीत सिंह ने निर्दलीय लड़कर 5368 वोटों से चुनाव जीता था। वहीं, इसके बाद 67 साल में कोई निर्दलीय प्रत्याशी बाढड़ा हलके में जीत दर्ज नहीं कर पाया।
वहीं, दादरी विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां के मतदाताओं ने पहली बार वर्ष 2019 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी सोमबीर सांगवान को जिताकर विधानसभा में भेजा था। सोमबीर सांगवान को 43,849 मत मिले थे जबकि जजपा उम्मीदवार एवं पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान करीब साढ़े 29,577 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे। इस चुनाव में दादरी हलके के 1,94,299 मतदाताओं में से 1,26,556 मतदाताओं ने मतदान किया। वर्ष 2019 के चुनाव से पहले दादरी हलके की जनता ने कभी किसी निर्दलीय उम्मीदवार को नहीं जिताया। संवाद
- बाढड़ा हलके के इन चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने दी टक्कर, बने उप विजेता
अगर बाढड़ा हलके की बात करें तो इसमें साल 1968 में अत्तर सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 8748 वोट हासिल कर उप विजेता रहे। वीएचपी से अमीर सिंह ने 11,460 वोट से जीत हासिल की। इसके बाद 1977 के चुनाव में अत्तर सिंह ने फिर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 15,621 वोट हासिल कर जनता पार्टी के उम्मीदवार को टक्कर दी। इसमें अत्तर सिंह को 35 फीसदी वोट मिले जबकि विजेता रणसिंह को 40 प्रतिशत मत हासिल हुए थे।
- दादरी हलके में दो बार निर्दलीय उम्मीदवार रहे उपविजेता
दादरी हलके की स्थिति देंखे तो इसमें भी दो बार ही निर्दलीय उम्मीदवार उप विजेता रहे हैं। इसमें पहली बार गणपतराय ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार विजेता बने प्रत्याशी को टक्कर दी थी। इसमें उन्होंने 9,349 मत हासिल किए थे जबकि जनता पार्टी से विजेता हुकम सिंह को 14,449 मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद साल 2005 में सतपाल सांगवान ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी नृपेंद्र सांगवान को टक्कर दी। इसमें सतपाल ने 27,874 जबकि नृपेंद्र को 29,164 मत हासिल किए। दोनों के बीच 1.35 फीसदी वोटाें का अंतर रहा।
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दादरी हलके से पहली बार चुने गए विधायक सोमबीर सांगवान। संवाद