चरखी दादरी। जिले के लिए पिछले कुछ दिन पर्यावरण के दृष्टिकोण से बेहद दुखद साबित हुए हैं। एक ओर जहां मौसम की मार ने प्रकृति को जख्म दिए हैं वहीं दूसरी ओर मानवीय लापरवाही ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले दिनों हुई घटनाओं ने पर्यावरण के संतुलन को गहरा नुकसान पहुंचाया है जिससे क्षेत्र में हरियाली का आवरण तेजी से सिमटता नजर आ रहा है।
बता दें कि जिले में पिछले दिनों कृषि क्षेत्रों में पराली जलाने की कुप्रथा ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। हाल ही में खेतों में लगी भीषण आग बेकाबू होकर आसपास के इलाकों में फैल गई। इस आग की चपेट में आने से लगभग 300 हरे-भरे पेड़ पूरी तरह जलकर राख हो गए। इनमें कई दशक पुराने पेड़ भी शामिल थे जो न केवल छाया और ऑक्सीजन के स्रोत थे बल्कि प्रकृति विज्ञान तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा थे।
खेतों में पराली जलाने की यह घटना न केवल वायु प्रदूषण का कारण बनी बल्कि इसने जैव विविधता को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं प्राकृतिक आपदा का दूसरा प्रहार तेज आंधी और तूफान के रूप में हुआ।
1 हजार से ज्यादा पेड़ों को नुकसान
पिछले कुछ दिनों में चली प्रचंड आंधी ने जिले में भारी तबाही मचाई है। हवा की गति इतनी तेज थी कि जड़ें मजबूत न होने और मिट्टी के कटाव के कारण लगभग 1 हजार पेड़ जड़ से उखड़ कर गिर गए। इन पेड़ों के गिरने से न केवल सड़कों पर यातायात बाधित हुआ बल्कि बिजली की आपूर्ति भी कई दिनों तक चरमराई रही। उखड़े हुए इन विशाल पेड़ों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानों प्रकृति का सुरक्षा कवच टूट गया हो।
करीब 3 हजार पाैधे झुलसे
सबसे चिंताजनक स्थिति पौधों की नई खेप की है। भीषण गर्मी और आग की लपटों और प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव से करीब 3 हजार छोटे पौधे झुलस गए हैं। प्रशासन और वन विभाग द्वारा पिछले पौधरोपण अभियानों के तहत पौधे लगाए गए थे जो भविष्य की हरियाली का आधार थे, नमी की कमी और विपरीत मौसम के कारण सूखकर नष्ट होने के कगार पर पहुंच गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर पौधों का झुलसना आने वाले समय में पर्यावरण असंतुलन की चेतावनी दे रहा है।
प्रशासन और समाज के सामने बड़ी चुनौती
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते पराली जलाने पर सख्ती नहीं बरती गई और पौधरोपण के बाद उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो जिले का वातावरण आने वाले वर्षों में और अधिक तपिश का सामना करेगा।
पराली जलाने वाले लोगों पर हो सख्त कार्रवाई
इस आपदा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल पेड़ लगाना ही काफी नहीं है बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने अब मांग की है कि नष्ट हुए पेड़ों की भरपाई के लिए एक वृहद पौधरोपण अभियान चलाया जाए और खेतों में आग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। जिले की धरती को फिर से हरा-भरा बनाने के लिए अब न केवल सरकारी प्रयासों की बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता की आवश्यकता है।
वन विभाग की ओर से खेतों में पराली की आग जले पेड़ों की जांच करवाने के लिए संबंधित थाना में शिकायत दर्ज करवाई गई है। वहीं, इसके साथ ही हमारी टीम भी वारदात को अंजाम देने वाले लोगों की जानकारी जुटा रही है। जांच में आने वाले लोगों पर विभागीय कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- सतीश दुहन, जिला वन अधिकारी