चरखी दादरी। नई पंचायतों के गठन के बाद अब तक 50 फीसदी सरपंचों ने विकास कार्यों के लिए बैंक खाते खुलवाए हैं। अभी तक 50 प्रतिशत सरपंचों ने खाता खुलवाने की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। खाता खुलवाने के लिए ग्राम सचिव व सरपंच के हस्ताक्षर होना जरूरी है। बैंक से राशि निकलवाने के लिए कार्य का ब्योरा व पंचायत के प्रस्ताव की प्रति जमा करवानी होगी और तब जाकर राशि निकाली जा सकेगी।
बता दें कि सरकार की ओर से जनसंख्या के आधार पर पीआरआई ग्रांट पिछले दिनों जारी की जा चुकी है। ई-टेंडरिंग को लेकर सरपंचों के विरोध के चलते सरपंच पीआरआई ग्रांट से विकास कार्य करवाने में भी रुचि नहीं ले रहे हैं। सरपंच सरकार के सकारात्मक निर्णय के इंतजार में हैं।
जिले में 166 ग्राम पंचायतें हैं। इस समय गांवों में विकास कार्यों की सख्त जरूरत है। छोटे स्तर के विकास कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। सरपंच गांवों में विभिन्न प्रकार की छोटी ग्रांटों से नालों, छोटी गलियों व अन्य छोटे मोटे कामकाज करवा सकते हैं। सरपंचों के पास दो लाख रुपये तक के कार्य खुद करवाने की पावर है इसके बाद 20 लाख तक के कार्य ई-टेंडरिंग के जरिये होने हैं।
- दो साल बाद मिली है पीआरआई ग्रांट
केंद्र सरकार साल में दो बार पीआरआई ग्रांट पंचायतों को देती है। साल में इसके तहत दो किस्त जारी होती हैं। यह बजट गांव की जनसंख्या के आधार पर मिलता है। इस बजट का 75 प्रतिशत पंचायतों को, 15 प्रतिशत ब्लॉक समितियों व 10 प्रतिशत जिला परिषदों को मिलता है ताकि विकास कार्य करवाए जा सकें। इस बार सरकार ने करीब दो साल बाद पीआरआई ग्रांट जारी की है।
लोग कर रहे विकास कार्यों का इंतजार
इस समय गांवों में लोग विकास कार्य शुरू होने की बाट जोह रहे है लेकिन अभी तक 50 प्रतिशत सरपंचों ने तो बैंक खाता तक नहीं खुलवाया है। पंचायत विभाग अधिकारियों की ओर से शपथ वाले दिन ही खाता खुलवाने के बारे में गाइडलाइन जारी कर दी गई थी। ई-टेंडरिंग में सरपंचों के विरोध के चलते जिन पंचायतों के बैंक खाते खुल गए हैं वे भी विकास कार्य करवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इन सरपंचों को सरकार की ओर से अपना निर्णय बदलने की उम्मीद है।
सरपंचों के बैंक खाते सक्रिय नहीं हो सके हैं। विभाग प्रक्रिया को पूरा करने में जुटा है। जल्द ही बैंक खाते खुल जाएंगे। ग्राम सचिव व सरपंच के हस्ताक्षर होने पर बैंक से विकास कार्यों की राशि निकाली जा सकेगी।
-अजीम सिंह, कनिष्ठ अभियंता, पंचायत विभाग