चरखी दादरी। तू डाल-डाल, मैं पात-पात... कहावत तो आपने सुनी होगी। यह कहावत सोमवार को हुए जिला परिषद चुनाव में सटीक बैठती है। सूबे की सत्तासीन भाजपा-जजपा सरकार का गठबंधन चुनाव में काम नहीं आया। यहां दोनों राजनैतिक संगठनों के पदाधिकारी आपसी सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाए और दोनों ने अपना-अपना उम्मीदवार जिला परिषद की प्रधानी के लिए मैदान में उतारा। नतीजा यह रहा कि भाजपा ने चारों खंड पंचायत समिति की सीट जीतने के बाद जिला परिषद की दोनों सीटों पर भी कब्जा कर लिया। जजपा जिला परिषद में प्रधान बनाकर खाता खोलने की फिराक में थी, लेकिन उनके मंसूबे धरे रह गए।
दादरी जिले में चार खंड पंचायत समिति हैं जबकि जिला परिषद का चुनाव पहली बार ही हुआ है। दादरी पंचायत समिति के चुनाव में भाजपा ने प्रधान और उपप्रधान पद मतदान के जरिये अपने पक्ष में किया था। वहीं, बाढड़ा पंचायत समिति के चुनाव में भी दोनों पद भाजपा के खाते में गए थे। बौंदकलां पंचायत चुनाव में भाजपा समर्थित पूजा को सर्वसम्मति से प्रधान चुना गया था जबकि उपप्रधान पद का भाजपा समर्थित उम्मीदवार मतदान के जरिये जीती थी। झोझूकलां पंचायत समिति चुनाव के नतीजे भी भाजपा के पक्ष में रहे थे।
इसके बाद बची जिला परिषद प्रधान की सीट के लिए टक्कर भाजपा और जजपा के बीच रही। दोनों संगठनों की बैठक होने के बाद भी एक उम्मीदवार को उतारने पर सहमति नहीं बन पाई। यहां तक कि दोनों संगठनों ने इसे साख का सवाल मानते हुए ऐडी-चोटी तक का जोर लगाया। जिला परिषद चुनाव में दोनों संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी पूरे दांव-पेच खेले। अंत में भाजपा की रणनीति जजपा पर भारी पड़ी। संवाद