चरखी दादरी। इस मौसम में सरसोंं की फसल में व्हाइट ट्रस्ट रोग के प्रति किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। इस समय सरसों पकाव अवस्था में है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रथम स्टेज में ही इस रोग का उपचार कारगर माना गया है। दूसरी और तीसरी स्टेज में तो रोग ग्रस्त पौधे को उखाड़कर इसे मिट्टी में ही दबाना पड़ता है।
जिन किसानों ने अक्तूबर-नवंबर माह में सरसों की अगेती बिजाई की थी, अब उन पर फलियां आ चुकी हैं। इसके लिए साथ ही पौधों के रोगग्रस्त होने का भी अंदेशा हो गया है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम एवं तापमान असंतुलित बने रहने पर सरसों की फसल में रोग लगने की आशंका ज्यादा होती हैं। सरसों में व्हाइट ट्रस्ट यानी सफेद रतवा रोग बढ़ जाता है। इस रोग में प्रथम स्टेज के दौरान अगर पत्तियों पर सफेद रंग का चूर्ण बना दिखाई देता है तो कीटनाशक का स्प्रे कर देना चाहिए, इससे इसका बचाव संभव है। दूसरी स्टेज में यह रोग तने तक पहुंच जाता है और तीसरी स्टेज में तो पौधे का पूरी तरह से विकास एवं वृद्धि रुक जाती है। ऐसी स्थिति में ऐसे रोगग्रस्त पौधे को जड़ समेत उखाड़कर मिट्टी में दबा देना चाहिए।
- कॉबिंडाजिम और एंडोफिल कीटनाशक दवा का करें छिड़काव
प्रथम स्टेज में दवा के तौर पर कॉरबिंडाजिम व एंडोफिल कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जा सकता है। 200 एमएल दवा 400 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
- एफिड रोग का भी खतरा
इसी प्रकार इस मौसम में एफिड यानी चेपा की शिकायत भी सरसों में बढ़ जाती है। इसमें हरे रंग का जीव पौधे के पत्तों एवं फलियों पर बैठकर नुकसान पहुंचाता है। जीव पत्तों में छेद कर देता है और पत्तियोंं के रस को खत्म कर देता है। इसके लिए रोगोर दवा का छिड़काव किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की किसानों के लिए सलाह है कि जब भी आसमान में बादल छाए हो फसलों में स्प्रे न करें। पछेती फसलों में यह रोग ज्यादा लगने की संभावना होती है।
- प्रदेश में बढ़ा है सरसों का बिजाई रकबा
विदित रहे प्रदेश में इस बार भी सरसों का बिजित रकबा ज्यादा है। दो सालों से सरसों के भाव बढि़या होने की वजह से किसानों का रुझान इस फसल के प्रति बढ़ा है। इस फसल में एक ही सिंचाई से पूर्ति हो जाती है। पानी की खपत ज्यादा नहीं होती है। लागत खर्च भी इतना नहीं आता है। ऐसे में सरसों का रकबा गेहूं की अपेक्षा बढ़ा है। किसान रामअवतार, धारे सिंह व सुरेंद्र का कहना है कि सरसों नकदी फसल है। इसमें लागत खर्च कम आता है।
किसान सरसों की पत्तियां, फलियां व टहनी आदि की अच्छी तरह से परख करें। रोग की शिकायत मिलने पर विशेषज्ञों की सलाह से दवा का छिड़काव करें। कृषि विभाग अधिकारियों से सलाह लेते रहे। अब फसल पकाव की अवस्था में है ऐसे में इसकी नियमित निगरानी रखना जरूरी है।
-डॉ. जितेंद्र सिंह, कृषि विशेषज्ञ