चरखी दादरी। बच्चे की प्रतिभा को पहचानना और तराशने में मदद करना माता-पिता का फर्ज है। यह जिम्मेदारी अगर सही से निभाई जाए तो बच्चे न केवल राष्ट्र स्तर पर बल्कि विश्व स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ सकते हैं। खातीवास निवासी 9 वर्षीय दृष्टि फौगाट इसकी बानगी है। दृष्टि ने एक मिनट में 54 सुंदर और आकर्षक शब्द लिखकर विश्व रिकॉर्ड बनाया है और इस कारनामे के लिए शनिवार को लंदन की संस्था ने दृष्टि को इंदौर में सम्मानित किया है।
दृष्टि की मां निर्मला ने बताया कि उनकी बेटी ने महज दो साल की उम्र में लिखना शुरू कर दिया था। दृष्टि लिखने की शौकीन है। लिखने की शुरुआत उसने घर की दीवारों से की। इस पर निर्मला ने बेटी के हुनर को तराशने की सोची। निर्मला ने बताया कि वो इतिहास से एमए पास है और गृहिणी हैं। उन्होंने ढाई साल की उम्र से ही दृष्टि की लिखावट पर ध्यान दिया और उसे सुंदर लेखन के साथ विभिन्न प्रकार के अक्षरों की बनावट सिखाई। शिक्षण संस्था ने उसके हुनर को और आगे बढ़ाने में मदद की।
निर्मला ने बताया कि 2022 में ही दृष्टि ने एक मिनट में सर्वाधिक शब्द लिखकर राष्ट्र स्तर पर रिकॉर्ड बनाया था। करीब छह माह पहले लंदन की संस्था वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए दृष्टि ने आवेदन किया था। इसके बाद संस्था ने टीम को दृष्टि के घर भेजा और टीम वहां से उसके हुनर की वीडियो बनाकर ले गई। दृष्टि की मां निर्मला के अनुसार 67 प्रतिभागियों ने इस स्पर्धा में भाग लिया। दृष्टि ने सभी को पछाड़ते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाया। उस दौरान दृष्टि की उम्र साढ़े 8 साल थी। इस उपलब्धि के लिए शनिवार को इंदौर में नेपाल की बिजनेस आइकान डॉ. भवानी राणा, आईएएस दिनेश जैन और मध्यप्रदेश के एडीजीपी कृष्णा प्रकाश ने दृष्टि को सम्मानित किया। संवाद
- हर रोज बच्चों के लिए तीन घंटे निकालती है निर्मला
गृहिणी निर्मला 9 वर्षीय बेटी और 6 वर्षीय बेटे के लिए प्रतिदिन तीन घंटे निकालती हैं। इस दौरान वो उन्हें न केवल लेखन कार्य करवाती हैं, बल्कि इंटरनेट पर देखकर नए-नए प्रकार से अक्षर बनाना भी सिखाती हैं। बेटी दृष्टि की इस उपलब्धि में पिता धीरपाल का भी योगदान है।
- बच्चों की प्रतिभा को न करे नजरअंदाज, आगे बढ़ने में करे मदद
दृष्टि की मां निर्मला और पिता धीरपाल का कहना है कि उन्हें बेहद खुशी है कि बेटी ने राष्ट्र स्तर के बाद विश्व स्तर पर लेखन में रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने अन्य अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वो अपने बच्चों की प्रतिभा पर ध्यान दें और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करे। यह नजरिया रखने से बच्चों को अपना हुनर तराशने में मदद मिलेगी।