- अभी भी कोर्ट परिसर में घूम रहा बंदरों का झुंड, नगर परिषद अधिकारी बोले: एजेंसी पिंजरा लगाकर पकड़ चुकी 18 बंदर
- बार प्रधान बोले: एक ही दिन लगाया गया पिंजरा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहर स्थित कोर्ट परिसर में बंदरों की समस्या बरकरार है। चालाक बंदरों के आगे एजेंसी का पिंजरा बेकार साबित हो रहा है। बंदर अब भी कोर्ट परिसर स्थित अधिवक्ताओं के चैंबर के आसपास घूम रहे हैं। अधिवक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी पिंजरा लगा रही है, लेकिन, चालाक बंदरों को पकड़ने में समय लग रहा है।
कोर्ट परिसर में बंदर घूम रहे हैं। दो बार पिंजरा लगाकर एजेंसी केवल 18 बंदर ही पकड़ पाई है। बंदर पकड़ो अभियान की गति धीमी होने के चलते अब भी कोर्ट परिसर में बंदरों का झुंड घूम रहा है।
अधिवक्ता संजीव सरोहा, अजय कुमार, सूरज खुराना, गौरव फोगाट आदि ने बताया कि पिंजरा दो बार लगाया गया है, लेकिन, बंदरों से निजात नहीं मिली है। चैंबरों और बाहर शेड के नीचे बैठने वाले अधिवक्ताओं को काफी परेशानी होती है। बंदर उनकी फाइलें और बैग आदि उठा ले जाते हैं। अब शाम के समय तो झुंड ठंड से बचने के लिए चैंबरों में आ जाता है। पूरी रात वहीं रहता है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि बंदरों के कारण रास्ता अवरुद्ध रहता है। अगर वे चैंबर में जाने की कोशिश करें तो बंदर हमला करने का प्रयास भी करते हैं। इनके अलावा परिसर के पौधे, पानी की टंकियों के पाइप आदि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। टंकी के पाइप टूटने से पानी की बर्बादी होती है। अधिवक्ताओं को शौचालय प्रयोग के लिए पानी नहीं मिल पाता है। इसलिए उन्हाेंने विभाग व एजेंसी से कोर्ट परिसर को प्राथमिकता के आधार पर बंदरमुक्त कराने की मांग की है।
वर्सन:
एजेंसी की ओर से केवल एक ही बार पिंजरा लगाया हुआ देखा है। उसके बाद पिंजरा नहीं लगाया गया। बंदरों से अधिवक्ताओं को परेशानी हो रही है। कई बार तो पूरा झुंड ही अचानक आ जाता है। बंदर पकड़ने वाली एजेंसी को पहले कोर्ट परिसर को प्राथमिकता देनी चाहिए।
-नसीब राणा, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन
वर्सन:
एजेंसी कोर्ट में पिंजरा लगा चुकी है। मुहिम की शुरुआत भी वहीं से की गई थी। बंदर चालाक हैं। आसानी से पिंजरे में नहीं आ रहे। फिर भी एजेंसी को आदेश दिए जाएंगे कि कोर्ट परिसर के बंदरों को पकड़ने के लिए फिर से पिंजरा लगाएं।
-राजेश कुमार, सीएसआई, नगर परिषद
फोटो- 09
दादरी कोर्ट परिसर में घूमता बंदरों का झुंड। संवाद