बैठक में शिकायतें सुनते हुए मंत्री अरविंद शर्मा व अन्य।
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चरखी दादरी। लघु सचिवालय में शनिवार को कष्ट निवारण समिति की बैठक में पहुंचे सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा ने अधिकारियों को आपसी तालमेल से काम करने की नसीहत दी है। साथ ही जो अधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं हुए उन्हें नोटिस भेजने का आदेश दिया। मंत्री ने कहा कि बैठक में विभागों के मुखिया जरूर उपस्थित हों। इसके अलावा लघु सचिवालय भवन में हो रही देरी के लिए लिखित में कारण बताओ नोटिस जारी करने के भी आदेश दिए। बैठक में रखीं 11 शिकायतों में से 9 का मौके पर ही समाधान किया गया।
मंत्री अरविंद शर्मा कष्ट निवारण समिति की बैठक में शिकायतें सुन रहे थे। इस दौरान पार्षद कुलदीप सैनी ने नए लघु सचिवालय भवन के काम को तेजी से करवाने की शिकायत रखी। इस पर लोक निर्माण विभाग व बिजली निगम के कार्यकारी अभियंताओं को कहा कि अपनी छोटी-छोटी समस्याएं अपने स्तर पर ठीक करें। ऐसी हरकतें न करें जिससे कोई सख्त कार्रवाई करनी पड़े। मिल-जुलकर काम करें। साथ ही मंत्री ने अगली मीटिंग में प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करवाने को कहा। साथ ही उपायुक्त को दोनों विभागों की ओर से काम लेट होने का कारण लिखित में जमा करवाने को कहा।मंत्री ने कहा कि 11 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने लघु सचिवालय भवन का उद्घाटन किया था लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हुआ है।
बैठक में पुलिस अधीक्षक लोगेश कुमार पी, भाजपा जिला अध्यक्ष सुनील इंजीनियर, एसडीएम डॉ. विरेंद्र सिंह व आशीष सांगवान, सीईओ प्रदीप अहलावत, सीटीएम डॉ. सुभाष चंद्र, डीएमसी हरबीर सिंह, डीडीपीओ राजपाल चहल व डीआरओ राजकुमार भोरिया सहित विभागों के अधिकारी व कर्मचारी और समिति के सदस्य मौजूद रहे।
अस्पताल पर कार्रवाई के आदेश : नए परिवाद में चिड़िया निवासी नरेश कुमार ने शिकायत रखी कि उसकी पत्नी की डिलीवरी 2020 में एक निजी अस्पताल में हुई थी। तब चिकित्सकों ने एक बड़ी पट्टी अंदर ही छोड़ दी थी बाद में जोधपुर में ऑपरेशन हुआ था। मामले में पुलिस ने अस्पताल को पार्टी नहीं बनाया था। बाद में तत्कालीन सीएमओ ने एफआईआर करवाई और अस्पताल को ताला लगा था लेकिन अस्पताल में एक अन्य चिकित्सक के खिलाफ चालन केस पेश कर दिया लेकिन जिसका अस्पताल है उसने सर्जरी की थी। इस पर मंत्री ने अधिकारियों काे लापरवाही न करने और इस पर केस दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट को अपनी रिपोर्ट जमा करवाने काे कहा। शिकायतकर्ता की अपील पर उपायुक्त की देखरेख में जांच के आदेश दिए।