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कोरोना के सैंपल जांच के लिए देरी से भेजने पर माइक्रोबायोलॉजिस्ट बर्खास्त

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कोरोना सैंपल जांच के लिए भेजने में देरी करने पर सिविल अस्पताल में तैनात माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. नविता पर गाज गिरी है। स्वास्थ्य विभाग ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए माइक्रोबायोलॉजिस्ट की सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी है। सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही सीएमओ ने माइक्रोबायोलॉजिस्ट को टर्मिनेट करने के आदेश दिए हैं।
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गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के आदेशों पर उपायुक्त ने पांच दिसंबर को एसडीएम विरेंद्र सिंह को सिविल अस्पताल में कोरोना सैंपल भेजने की प्रक्रिया का निरीक्षण करने के लिए भेजा था। एसडीएम को सिविल अस्पताल के एक कमरे में 5257 सैंपल रखे मिले थे। इनमें से कुछ सैंपल तो कई दिन पहले लिए गए थे। एसडीएम ने निरीक्षण की रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त की मार्फत स्वास्थ्य विभाग को भिजवा दी थी। इसके तीन दिन बाद स्वास्थ्य सेवाओं के एडीजी जितेंद्र ग्रेवाल जांच के लिए दादरी पहुंचे थे। उन्होंने इस मामले में तत्कालीन कोरोना नोडल अधिकारी समेत स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा था, जिनमें माइक्रोबायोलॉजिस्ट भी शामिल थी।
एडीजी की जांच के अलावा सीएमओ सुदर्शन पंवार ने अपने स्तर पर भी मामले की जांच करवाई। जांच रिपोर्ट में अब तक माइक्रोबायोलॉजिस्ट की गंभीर चूक सामने आई जिसके आधार पर उसे टर्मिनेट किया गया है। टर्मिनेशन के बाद अब सिविल अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट का पद खाली है। सूत्रों के अनुसार साक्षात्कार प्रक्रिया के जरिये इस पद को अगले एक-दो दिन में ही भरा जाएगा।
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तत्कालीन कोरोना नोडल अधिकारी अधिकारी को भेजा रानीला पीएचसी
माइक्रोबायोलॉजिस्ट से पहले जिला स्वास्थ्य विभाग कोरोना नोडल अधिकारी भी बदल चुका है। तत्कालीन कोरोना नोडल अधिकारी चंचल तोमर को अब रानीला पीएचसी पर तैनात किया गया है। उनकी जगह करीब चार दिन पहले ही डॉ. गौरव भारद्वाज को कोरोना नोडल अधिकारी और डॉ. संदीप को अतिरिक्त कोरोना नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
सैंपल भेजने में माइक्रोबायोलॉजिस्ट की ये होती है भूमिका
सैंपल लैब में भेजने से पहले सिविल अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पास ही जमा होते हैं। यहां से सैैपलों को पैक करवाकर लैब में भेजने की जिम्मेदारी माइक्रोबायोलॉजिस्ट की होती है। इसके बाद सैंपलों की रिपोर्ट आने पर रिपोर्ट आगे भेजनी होती है।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट को लापरवाही बरतने पर हमने टर्मिनेट कर दिया है। जल्द ही खाली पद को हम साक्षात्कार के जरिये भर देंगे। 24 घंटे से अधिक समय तक कोई सैंपल अब लैब में नहीं रखा जा रहा। मैं स्वयं इसकी रिपोर्ट ले रहा हूं।
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- डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ, चरखी दादरी
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