चरखी दादरी। शहर की सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु...शरीर पर उभरी गांठें...स्वस्थ पशुओं के बीच घूमते संदिग्ध गोवंश.. और दूसरी तरफ पशुपालन विभाग का दावा-जिले में लंपी की पुष्टि ही नहीं हुई। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर शहर की सड़कों पर दिखाई दे रहे इन पशुओं की जांच कौन करेगा और बीमारी नहीं है तो इन लक्षणों की वजह क्या है?
लंपी को लेकर प्रदेश के कई हिस्सों में चिंता बढ़ रही है लेकिन दादरी में स्थिति को लेकर विभागीय दावे और जमीनी तस्वीर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। कॉलेज रोड, चंपापुरी, महेंद्रगढ़ चुंगी सहित शहर के कई हिस्सों में लंपी जैसे लक्षण वाले पशु घूमते दिखाई दे रहे हैं। गो सेवकों का दावा है कि बीमारी जैसे लक्षणों वाले करीब 10 बेसहारा पशुओं की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद शहर में संदिग्ध पशु अभी भी खुले में घूम रहे हैं।
पशुओं को कौन देखेगा
शहर में करीब 700 बेसहारा पशुओं के घूमने की बात सामने आ रही है। इनमें कई पशु ऐसे देखे गए हैं जिनके शरीर पर गांठें हैं। सबसे बड़ा खतरा यह है कि ये पशु किसी एक जगह सीमित नहीं हैं। सुबह बाजारों में, दिन में मुख्य मार्गों पर और शाम को कॉलोनियों में इनके झुंड दिखाई देते हैं। यदि इनमें से कोई पशु संक्रमित हुआ तो स्वस्थ पशुओं के संपर्क में आने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि इन पशुओं की जांच कब होगी।
10 गायों की मौत का दावा
गो सेवक रिंपी फोगाट का दावा है कि लंपी जैसे लक्षणों से पीड़ित करीब 10 बेसहारा गायों की मौत हो चुकी है। उनका कहना है कि अभी भी शहर में कई ऐसे पशु घूम रहे हैं जिनके शरीर पर लंपी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। गो सेवकों का कहना है कि अगर ये लक्षण लंपी के नहीं हैं तो पशु चिकित्सकों को इनकी जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर पशु किस बीमारी से पीड़ित हैं।
विभाग टीकाकरण काे बना रहा ढाल
पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में 46 हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य था जिसमें 45,600 पशुओं को वैक्सीन लगाए जाने का दावा किया गया है। बीमारी की निगरानी के लिए 35 टीमें भी तैनात हैं लेकिन सवाल बेसहारा पशुओं को लेकर है। इन पशुओं की नियमित पहचान, जांच और निगरानी कैसे हो रही है। इसके अलावा शहर की सड़कों पर घूम रहे संदिग्ध पशुओं तक टीमें कितनी पहुंच पा रही हैं।
राजस्थान से आने वाले पशु भी चिंता का कारण
गो सेवकों ने राजस्थान की ओर से आने वाले चरवाहों के पशुओं की निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उनका आरोप है कि बीमार पशुओं को रास्ते में छोड़ दिया जाता है और बाद में यही पशु बेसहारा होकर जिले के गांवों और शहरों में पहुंच जाते हैं। उनकी मांग है कि जिले की सीमाओं पर बाहर से आने वाले पशुओं की निगरानी हो और संदिग्ध पशुओं को झुंड से अलग कर उनकी जांच की जाए।
मच्छरों से फैल सकता है लंपी
पशुपालन विभाग स्वयं मानता है कि लंपी बीमारी मच्छर जैसे वेक्टर के माध्यम से फैल सकती है। विभाग ने पशुबाड़ों में सफाई रखने और मच्छररोधी दवाओं के छिड़काव की सलाह भी दी है। ऐसे में शहर में खुले में घूम रहे सैकड़ों बेसहारा पशु चिंता का विषय बन जाते हैं। इनमें यदि कुछ पशु वास्तव में संक्रमित हुए तो उनके लगातार झुंड में घूमने से बीमारी के फैलाव की आशंका पैदा हो सकती है।
वर्सन:
राजस्थान से आने वाले चरवाहे बीमार पशुओं को छोड़कर चले जाते हैं। सूचना मिलने पर हमारी टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर बीमार पशु का टीकाकरण और उपचार शुरू कर देती है। जिले में स्थिति से निपटने के लिए 35 टीमें तैयार हैं। लंपी के जांच के लिए भी सैंपल लिए गए हैं। जो बेसहारा पशु घूम रहे हैं उनकी जांच की जाएगी। - डॉ. जसवंत जून, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग