चरखी दादरी। पशुपालन विभाग सुरभि चयन शृंखला के तहत पशुधन की गुणवत्ता, नस्ल सुधार व दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 13 लीटर से ज्यादा दूध देने वाली गायों व भैंसों के दूध का मापन एवं गणना करेगा।
इसके लिए सभी पशु औषधालय एवं चिकित्सालयों में तैनात कर्मचारियों व चिकित्सकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। घर-घर जाकर इन पशुओं की सूची तैयार की जाएगी। जिले में पशुओं की कुल संख्या 1,53,675 है। इनमें भैंसों की संख्या 12,946 और गायोें की 28,000 है।
इस समय भारत दुग्ध उत्पादन मेंं दुनिया में नंबर वन है। भारत की दूध उत्पादन की गति इस समय 5.4 प्रतिशत वार्षिक है। इसमें खासकर हरियाणा प्रदेश का सराहनीय योगदान है। वैसे भी यह प्रदेश देसा म्ह देस हरियाणा, जित दूध-दही खाणा कहावत से देशभर में जाना जाता है। कृषि एवं पशुपालन में प्रदेश अग्रणी माना जाता है। किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन करते हैं, जिससे उनकी आय भी बढ़ती है और खान-पान भी पौष्टिक होता है।
वहीं, सरकार भी दुग्ध उत्पादन एवं नस्ल सुधार की दिशा में लगातार काम कर रही है। पशु अनुसंधान केंद्रों में हर साल पशुओं की नई नस्लें खोज करने पर काम हो रहा है। सरकार की ओर से हर साल राज्यस्तरीय पशु प्रदर्शनी भी लगाई जाती है। इसमें राज्य भर से 30 से अधिक कैटेगरी के पशु इसमें शामिल किए जाते हैं। पशुपालकों को पुरस्कार भी दिए जाते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों से दूध देने वाले पशुओं में भैंस की संख्या कम हुई है। गायों की संख्या बढ़ी है।
दूध में होते हैं सभी पोषक तत्व : पशु विशेषज्ञों की मानें तो चयन शृंखला का उद्देश्य पशुधन गुणवत्ता में सुधार लाना है। यह योजना पशुधन के लिए एक प्रजनन कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके माध्यम से नस्ल सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। ताकि, नस्ल सुधार के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन बढ़े। देश की आबादी हर साल बढ़ रही है। ऐसे में दूध का उत्पादन बढ़ाना भी जरूरी हो गया है। दूध ऐसा तरल पदार्थ है, जिसमें शरीर के विकास के लिए आवश्यक तकरीबन सभी प्रकार के पोषक तत्व होते हैं। संवाद