शुभनराम अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी के साथ।
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गांव झोझू कलां निवासी 99 वर्षीय शुभनराम के परिवार की पांच पीढ़ियां एक ही छत के नीचे रहती हैं। पति-पत्नी और दो बच्चों के परिवार की महानगरीय सोच से विपरीत इनके परिवार में सदस्यों की संख्या भी काफी है। ऐसे में ये परिवार न सिर्फ जिले बल्कि दूर-दूर तक मिसाल बना हुआ है। पांचवीं पीढ़ी के तहत प्रियांशु का जन्म कुछ दिन पहले ही हुआ है।
परिवार के मुखिया शुभनराम ने बताया कि उनका बड़ा पुत्र राम सिंह (73 ) भारतीय सेना से रिटायर है। राम सिंह का बड़ा बेटा जयप्रकाश (52) है। जयप्रकाश का बेटा अनिल कुमार (30) है जबकि पांचवीं पीढ़ी के रूप में अनिल के पुत्र प्रियांशु ने परिवार में जन्म लिया है।
गांव के बुजुर्ग बताते कि परिवार में पांच पीढ़ियों का मौजूदा होना सौभाग्य माना जाता है। विरले ही परिवार में एक साथ पांच पीढ़ियां देखने को मिलती हैं। परिवार के मुखिया 99 वर्षीय शुभनराम का मानना है कि संयुक्त परिवार से बच्चों में संस्कार बढ़ते हैं। बुजुर्गों के संपर्क में रहने से बच्चों में परिवारिक एवं सामाजिक गुणों का विकास होता है। आपस में मिल-जुलकर रहने एवं एकता की भावना का विकास भी होता है। आजकल के भौतिकवादी युग में एकल परिवार से व्यक्ति अकेला ही रह गया है। अकेले में जीवन व्यतीत करते हुए व्यक्ति मानसिक तनाव एवं अवसाद का शिकार हो जाता है। ऐसे में संयुक्त परिवार जिसमें पांच पीढ़ियां हो उससे जीवन में अनुशासन एवं आदर सम्मान की भावना का विकास होता है।
शुभनराम का कहना है कि लॉकडाउन में सभी एकत्र रहते हुए दिनभर आपस में बातचीत करते हैं। बच्चों के बीच बढ़िया समय बीतता है। बच्चों में सेवाभाव भी देखने को मिलता है। लॉकडाउन में समय का बेहतर तरीके से सदुपयोग हो रहा है।