फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Charkhi Dadri News: गुलाबी सुंडी से बचाव के लिए सारंगपुर में लगी किसान पाठशाला, विशेषज्ञों ने बताए वैज्ञानिक प्रबंधन के उपाय

Thu, 16 Jul 2026 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
विज्ञापन
विज्ञापन
चरखी दादरी। कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) के शुरुआती प्रकोप को देखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा की ओर से ग्राम सारंगपुर में विशेष किसान पाठशाला (फार्मर फील्ड स्कूल) का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य किसानों को समय रहते वैज्ञानिक तरीके अपनाकर फसल को नुकसान से बचाने के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक प्रगतिशील कपास उत्पादक किसानों ने भाग लिया।
विज्ञापन

कार्यक्रम में सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ. राम कुमार शर्मा, क्षेत्रीय केंद्रीय नाशजीवी प्रबंधन केंद्र फरीदाबाद के वैज्ञानिक सहायक लख्मी चंद और कृषि विभाग के डॉ. राकेश कुमार ने किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) की विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने किसानों के साथ खेतों का दौरा कर कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी के शुरुआती प्रकोप की पहचान कराई और इसके नियंत्रण के प्रभावी उपाय समझाए।

टिंडे से पहले नियंत्रण संभव
विशेषज्ञों ने बताया कि गुलाबी सुंडी का प्रभावी नियंत्रण केवल टिंडे बनने से पहले ही संभव है। यदि सुंडी टिंडे के भीतर प्रवेश कर जाती है तो उसके बाद किसी भी रासायनिक दवा का असर नहीं होता। इसलिए शुरुआती अवस्था में ही नियमित निगरानी और वैज्ञानिक उपाय अपनाना बेहद आवश्यक है।
विज्ञापन


किसानों ने बताई समस्याएं
किसानों को यह भी बताया गया कि फसल कटाई के बाद खेतों में बचे हुए डंठल, अनखिले टिंडे और अन्य अवशेषों में गुलाबी सुंडी के लार्वा छिपे रहते हैं, जो अगली फसल में फिर से नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए कपास की चुगाई पूरी होने के बाद सभी अवशेषों को नष्ट कर कीट का जीवन चक्र तोड़ना जरूरी है।

पीले और नीले स्टिकी ट्रैप वितरित
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पीले और नीले स्टिकी ट्रैप वितरित किए गए तथा खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाने का लाइव प्रदर्शन भी किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि फेरोमोन ट्रैप नर पतंगों को आकर्षित कर उनके प्रजनन को रोकने का रसायन मुक्त और प्रभावी तरीका है। वहीं येलो स्टिकी ट्रैप सफेद मक्खी और चेपा जैसे रसचूसक कीटों की रोकथाम में मदद करता है, जबकि ब्लू स्टिकी ट्रैप थ्रिप्स की पहचान और नियंत्रण के लिए उपयोगी है।

रसायनों के कम इस्तेमाल की अपील
विशेषज्ञों ने किसानों से बिना आवश्यकता भारी मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अनावश्यक रसायनों के प्रयोग से खेती की लागत बढ़ती है और खेतों में मौजूद मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। किसानों को आर्थिक नुकसान सीमा (ईटीएल) के आधार पर ही कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए। किसान पाठशाला के अंत में विशेषज्ञों ने किसानों की विभिन्न कृषि संबंधी समस्याओं और शंकाओं का समाधान भी किया।

कोट:
किसान भाइयों से अपील है कि अपने खेतों की निगरानी करें और जहां भी कोई गुलाबी सुंडी होने के लक्षण दिखाई दें या सुंडी दिखाई दें तो उसको नष्ट करें। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि विकास अधिकारी से संपर्क करें।
- चंद्रभान श्योराण, वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ, चरखी दादरी

कोट:
किसान भाइयों से पुरजोर अपील है कि कपास फसल की अच्छी पैदावार लेने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी कृषि संदेशों और समग्र सिफारिशों के आधार पर की कीटनाशकों और उर्वरकों (खादों) का प्रयोग करें। अंधाधुंध कीटनाशकों के छिड़काव से बचें, क्योंकि अनावश्यक कीटनाशकों के छिड़काव से हमारे खेतों में मौजूद मित्र कीट मर जाते हैं।- डॉ. रवींद्र जाखड़, उप कृषि निदेशक, चरखी दादरी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें