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केसीसी लोन मिला नहीं, फिर भी बन गए बैंक के कर्जदार

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चरखी दादरी। बौंदकलां उप तहसील कार्यालय स्टाफ की रजिस्टरी में बरती गई कोताही का खामियाजा रानीला निवासी मां-बेटे को भुगतना पड़ रहा है। केसीसी कार्ड पर दोनों का 5.12 लाख का लोन स्वीकृत हो चुका है, लेकिन बैंक की ओर से अब तक राशि दोनों आवेदकों को जारी नहीं हुई है। इसका कारण रजिस्टरी की खामी है और बैंक प्रबंधक इस संबंध में तहसीलदार को पत्र लिखकर रजिस्टरी में कम दर्शाई गई 1 कनाल 19 मरला जमीन को लेकर जवाब मांगा है। दोनों आवेदकों का कहना है कि तहसीलदार ने बैंक मैनेजर के पत्र अनुसार रजिस्टरी की तसदीक करने से मना कर दिया। इसके चलते वीरवार को मामले की शिकायत डीसी श्यामलाल पूनिया और सीएम विंडो पर की गई है।
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रानीला निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि उसने 11 कनाल 4 मरला जमीन की केसीसी कार्ड लोन के लिए रजिस्टरी करवाई थी। उसकी दो लाख 56 हजार रुपये लोन राशि स्वीकृत हुई थी। लेकिन जब उसने उप तहसील कार्यालय की ओर से बनाई गई रजिस्टरी जमा कराई तो उसके दिए गए जमीन संबंधी ब्योरे और रजिस्टरी में दर्ज आंकड़े के अनुसार एक कनाल 19 मरला जमीन कम मिली। जमीनी रिकॉर्ड में अंतर आने से बैंक की ओर से तीन माह बाद भी लोन राशि जारी नहीं की गई है। प्रदीप ने बताया ऐसा ही उसकी मां के साथ हुआ है। वो कागजों में केसीसी कार्ड के ऋणी तो हो गए हैं, लेकिन उन्हें अब तक लोन के पांच लाख 12 हजार रुपये नहीं मिले हैं। इस संबंध में वीरवार को उन्होंने सीएम विंडो पर शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
- बैंक मैनेजर ने लिखा पत्र
प्रदीप कुमार और भतेरी देवी ने बताया कि जमीन संबंधी रिकॉर्ड रजिस्टरी से मेल न खाने पर बैंक मैनेजर ने तहसीलदार को पत्र भी लिखा है जबकि बावजूद इसके तहसीलदार की ओर से जवाब नहीं दिया गया है।
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मैं भाजपा जिला कार्यकारिणी सदस्य हूं। जब हमारे साथ ही गलत हो रहा है तो आम आदमी का क्या हाल होगा, अंदाजा लगा सकते हैं। बौंदकलां उप तहसील में बिन खर्ची कुछ काम नहीं होता। अगर पांच दिन के अंदर रजिस्टरी में बरती गई चूक नहीं सुधारी गई तो न्यायालय की शरण लूंगा।
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-प्रदीप रानीला, शिकायतकर्ता
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