चरखी दादरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्तूबर 2014 को दिल्ली के राजपथ से स्वच्छता अभियान की शुरुआत की थी। नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और मुहिम से चरखी दादरी जिले के गांव कारीमोद निवासी रामचंद्र इतने प्रभावित हुए कि वो ट्रक ड्राइवर से झाड़ू मैन बन गए। पिछले 9 साल से रामचंद्र हर रोज पांच से छह घंटे श्रमदान करते हैं।
खास बात ये है कि रामचंद्र केवल अपने गांव, जिले या प्रदेश में ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों में जाकर भी स्वच्छता प्रहरी के तौर पर देश के जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज निभा रहे हैं। रामचंद्र ने बताया कि प्रदेश की 50 पंचायतों के साथ गुजरात की तीन पंचायतें उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित कर चुकी हैं।
दरअसल, अक्तूबर 2014 से ही रामचंद्र ने प्रतिदिन स्वच्छता के लिए श्रमदान करना दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है। इसके चलते उन्होंने अपना पेशा छोड़ दिया और एक बेटे ने घर चलाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। वहीं, उनका दूसरा बेटा लोहारू क्षेत्र के एक मंदिर में सेवक के तौर पर रहता है। रामचंद्र का कहना है कि उनका एक बेटा नौकरी के जरिये उन्हें तीनों पहर का खाना दे देता है।
नरेंद्र मोदी के लिए किए अनशन, विधायक और सांसद ने करवाए खत्म
वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, इसके लिए रामचंद्र ने अनशन किया था। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद धर्मबीर सिंह ने उनका अनशन खत्म करवाया था। उनका एक अनशन बाढड़ा के तत्कालीन विधायक सुखविंद्र मांढ़ी खत्म करवा चुके हैं। दोनों अनशन उन्होंने नरेंद्र मोदी के लिए किए।
पुत्रवधू ने पीएम को लिखा पत्र, ससुर आपके भक्त, न मिल पाने का भारी मलाल
रामचंद्र ने बताया कि उनकी पुत्रवधू ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। पत्र में उसकी पुत्रवधू ने लिखा प्रधानमंत्री जी, मेरे ससुर रामचंद्र आपके भक्त हैं। 9 साल से आपकी स्वच्छता मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। इस काम में अपना सब गंवा चुके हैं। दो बार उन्होंने आपसे मिलने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने वापस भेज दिया। आपसे गले न लग पाने का उन्हें अब तक मलाल है।
सुबह पांच बजे निकलते हैं झाड़ू लेकर
रामचंद्र की पिछले 9 साल से जो दिनचर्या है उसके अनुसार सुबह पांच बजे वो झाड़ू लेकर निकल जाते हैं। कभी इस गांव तो कभी दूसरे गांव और कभी किसी अस्पताल या सरकारी स्कूल को चमकाने पहुंच जाते हैं। आस-पास के गांव में जाने वो दोपहर एक बजे तक घर लौटते हैं और शाम को फिर से सफाई काम में जुट जाते हैं।
रामचंद्र बोले : पत्नी ने एक बार किया विरोध, समझाया तो मान गई
रामचंद्र ने बताया कि 2014 में स्टेयरिंग छोड़ झाड़ू उठाकर गांव के सार्वजनिक स्थानों की सफाई शुरू की तो पत्नी मुन्नी देवी को ये बात रास नहीं आई। उसने विरोध किया तो उसने समझाया कि ये बहुत नेक काम है और उसे मन की संतुष्टि मिलती है। रामचंद्र के अनुसार इसके बाद उसकी पत्नी ने कभी नहीं रोका।