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Charkhi Dadri News: कारगिल शहीद हवलदार राजबीर का बेटा चिकित्सक बन कर रहा देशसेवा

Tue, 25 Jul 2023 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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हवलदार राजबीर का परिवार।
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चरखी दादरी। कारगिल युद्ध को 24 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसकी यादें आज भी सैनिकों के परिवारों के जहन में ताजा हैं। दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए कारगिल युद्ध में जिले के 6 जांबाजों ने सर्वाेच्च बलिदान दिया और उनमें से मौड़ी निवासी हवलदार राजबीर भी एक थे। राजबीर की अब अगली पीढ़ी देशसेवा के क्षेत्र में आ चुकी है। उनकी शहादत के समय बेटा वीर श्योराण ढाई साल का था, जो अब चिकित्सक बनकर देशसेवा कर रहा है। इसी प्रकार भागवी निवासी शहीद जगदीश तक्षक का बेटा जंगवीर एमए अर्थशास्त्र की पढ़ाई कर रहा है और वो आईएएस बनना चाहता है।
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- 12वीं करते ही सेना में भर्ती हुए थे राजबीर, चार जाट रेजीमेंट में थे तैनात
गांव मौड़ी निवासी हवलदार राजबीर सिंह 12वीं पास करते ही सेना में भर्ती हो गए थे। 17 मई 1999 को उन्होंने देश के लिए शहादत दी। राजबीर के परिवार में उनकी पत्नी, दो पुत्र व एक पुत्री है। राजबीर सिंह चार जाट रेजिमेंट में कारगिल में तैनात थे। शहीद की पत्नी कमलेश देवी ने बताया कि जब उनका पति शहीद हुआ तो उस समय हालात थोड़े प्रतिकूल हो गए थे लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और अपने परिवार की प्रगति के लिए संघर्ष किया। कमलेश ने बताया कि उसने बच्चों का पालन पोषण किया। गांव में करीब पांच एकड़ जमीन में खेती भी की। ऐसे में उसे किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी महसूस नहीं हुई। उसे अपने परिवार, गांव का पूरा सहयोग मिला। लोगों ने उसे पूरा सम्मान दिया है। कमलेश देवी ने बताया कि वर्ष 2000 में उसे सरकार की ओर से भिवानी में पेट्रोल पंप अलॉट कर दिया गया, इस कारण उसे गांव छोड़कर भिवानी रहना पड़ा। इस समय उसका परिवार भिवानी में सेक्टर 13 में रह रहा है। कमलेश ने बताया कि उसका एक लड़का वीर श्योराण एमबीबीएस डॉक्टर व दूसरा लड़का राहुल कृषि विभाग में कार्यरत है। पुत्री की शादी कर दी है। कमलेश का कहना है कि सरकार की ओर से उसके परिवार को सभी आवश्यक सुविधाएं दी गई हैं। कमलेश ने कारगिल दिवस पर कहा कि शहीदों को कभी भुलाना नहीं चाहिए। देश के लिए प्राण न्योछावर करना गर्व की बात है।



- शहीद जगदीश तक्षक का परिवार भी सरकारी सुविधाओं से संतुष्ट
भागवी निवासी जगदीश तक्षक 26 जुलाई 2000 को श्रीनगर के गनीबाबा क्षेत्र में दुश्मन से मुकाबला करते हुए शहीद हो गए थे। शहीद के परिवार में उसकी पत्नी बबीता व पुत्र जंगवीर तक्षक है। जब जगदीश शहीद हुए थे, उस समय जंगवीर गर्भ में था। जंगवीर अब लगभग 23 साल का होने को है और इस समय वह एमए अर्थशास्त्र की पढ़ाई कर रहा है। शहीद के परिजन सरकार की ओर से दी गई सुविधाओं से संतुष्ट हैं। हालांकि शहीद के गांव के लोगों को मूलभूत सुविधाओं की कमी खल रही हैं। भागवी निवासी शिक्षक रमेश कुमार तक्षक ने बताया कि गांव में अब तक तीन जवान शहीद हुए हैं। 1965 की पाकिस्तान के साथ हुई लड़ाई में हरि सिंह शहीद हुए थे। उनके बाद जवान रमेश कुमार जम्मू कश्मीर में विशेष ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण परिवहन सुविधा को तरस रहे हैं। बुखार हाे जाने पर उपचार के लिए प्राथमिक उपचार तक की सुविधा नहीं है। राजकीय कन्या व राजकीय बॉय स्कूल भवन कंडम हो चुका है। सरकार को परिवहन की सुविधा शुरू करनी चाहिए। वहीं, गांव के पूर्व सरपंच संजय कुमार का कहना है कि सरकार व परिवहन विभाग को बड़ा गांव होने पर रोडवेज बस सेवा शुरू करनी चाहिए। ग्रामीणों व छात्रों का दादरी शहर में शिक्षण संस्थाओं में आना जाना होता है। सरकार को आबादी के अनुरूप चिकित्सा सुविधा भी शुरू करनी चाहिए।
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