चरखी दादरी। अटेला निवासी कल्लूराम के साहसिक कार्य से गांव का प्रत्येक व्यक्ति प्रभावित है। उनके संघर्ष और जज्बे की ग्रामीण खूब सराहना करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कल्लूराम की मेहनत मिसाल है और पशुओं के लिए तालाब बनाने में कल्लूराम ने किसी की मदद नहीं मांगी। ग्रामीणों का कहना है कि बारह साल पहले पहाड़ी को काटकर बनाए गए तालाब का लाभ केवल जंगली पशुओं को ही नहीं, बल्कि गांव के मवेशियों को भी लाभ मिलता है। हर मानसून सीजन में यह तालाब पानी से भर जाता है, जिससे कई माह का काम चल जाता है। कल्लूराम के सराहनीय कार्य पर संवाददाता की ग्रामीणों से हुई बातचीत पर एक रिपोर्ट...
- अजूबे से कम नहीं कल्लूराम का काम, पूरा गांव करता है सराहना
- कल्लूराम ने अपने 50 साल की मेहनत से ऐसा काम किया है जो किसी अजूबे से कम नहीं है। पहाड़ को काटकर लंबा, गहरा और चौड़ा तालाब बनाना आसान काम नहीं है। पूरा गांव इस कार्य की सराहना करता है। मेरी उम्र करीब 62 वर्ष है।
- प्रताप सिंह, पूर्व सरपंच।
- कल्लूराम ने ऐसा काम किया है जिसकी कल्पना शायद ही कोई इंसान कर सकता है। अकेले दम पर संसाधनों की कमी के बावजूद पशुओं की भलाई के लिए तालाब बनाना आसान काम नहीं है। मेरी उम्र 69 वर्ष है और मैंने स्वयं उसे ऐसा करते देखा है।
- लख्मीचंद शर्मा, ग्रामीण।
- मेरी उम्र 50 साल है और मैंने ताऊ कल्लूराम को हथौड़ा लेकर पहाड़ पर काम करते देखा है। उन्होंने इस काम में कभी किसी की मदद नहीं मांगी। उसकी मेहनत का परिणाम है कि अब प्यास के चलते पहाड़ी पर कोई पशु दम नहीं तोड़ता है।
- धर्मबीर सिंह, पूर्व सरपंच।
- कल्लू राम में बेसहारा और जंगली जानवरों को पानी पिलाने का जज्बा इतना था कि वो हर रोज आठ से दस घंटे तक पहाड़ की कटाई करता था। असंभव कार्य को उसने संभव कर दिया। 10 किलोग्राम वजनी हथौड़ा लेकर पहाड़ी पर चढ़ना और फिर काम करना बेहद मुश्किल है।
- धर्मबीर, ग्रामीण।