चरखी दादरी। कुश्ती के लिए चर्चित चरखी दादरी जिले के युवा कबड्डी में भी अपने कौशल से अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी धमक दिखा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर खिलाड़ियों ने आदमपुर खेल एकेडमी में प्रशिक्षण लिया है। यह एकेडमी देश को कबड्डी के 200 सूरमा दे चुकी है। खास बात ये है कि यहां 14 खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में ताल ठोकर देश को गौरवान्वित किया है।
आदमपुर कबड्डी मैदान में मेजर ध्यानचंद अवाॅर्डी विकास खिलाड़ियों को कबड्डी का अभ्यास करवाते हैं। विकास ने बतौर खिलाड़ी इसी मैदान से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने कॅरिअर में 23 पदक हासिल किए। उन्हें इस खेल उपलब्धि पर सरकार की ओर से मेजर ध्यानचंद अवाॅर्ड भी दिया गया था। विकास ने 13 राष्ट्रीय और 10 अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम किए।
कोच विकास ने बताया कि वर्ष 2013 में आदमपुर को कबड्डी मैदान की सौगात मिली थी। तब से 200 से अधिक खिलाड़ी कबड्डी का प्रशिक्षण लेकर अपनी मंजिल तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में 125 युवा खेल प्रशिक्षण के लिए आते थे, लेकिन अब 150 खिलाड़ी उनके पास प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें से 50 खिलाड़ी नर्सरी के हैं, जिनमें 25 लड़कियां और 25 लड़के हैं। कोच विकास ने बताया कि मैदान में खेलने वाले अधिकतर खिलाड़ियों की खेल कोटा के तहत नौकरी लग चुकी है। अब नौकरी पाने वाले खिलाड़ी और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अभ्यास के लिए मैदान में नहीं आते हैं। इस मैदान में खेल अभ्यास के लिए आसपास के गांवों से युवा आते हैं।
- इन खिलाड़ियों ने किया नाम रोशन
कोच विकास ने बताया कि खिलाड़ी नितेश सांगवान एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण और प्रियंका पिलानिया एशियन और दो बार विश्व कप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं रितु ने दक्षिण एशियाई स्पर्धा में स्वर्ण, पिंकी ने विश्व कप में स्वर्ण, कुलदीप और आशीष गांधी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीते हैं। दूसरी ओर दीपिका, रिंकी, सविता और वर्षा राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में नितेश, कुलदीप, आशीष समेत आठ खिलाड़ियों ने प्रो कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लिया था।
- ये रहती है खिलाड़ियों की दिनचर्या
कोच विकास सांगवान ने बताया कि खिलाड़ी रोजाना सुबह पांच से आठ बजे तक मैदान में अभ्यास करते हैं। इसके बाद सभी अपने घर चले जाते हैं। बाद में शाम 4:30 बजे से सात बजे तक खेल अभ्यास करते हैं। उन्होंने बताया कि नर्सरी के खिलाड़ियों को सरकार की ओर डाइट भत्ता दिया जाता है। खिलाड़ियों के लिए प्रवेश संबंधी कोई पाबंदी नहीं है। जिले का हर खिलाड़ी यहां आकर अभ्यास कर सकता है।
कोच की हैं ये उपलब्धियां
कोच विकास ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर दो रजत, तीन कांस्य और आठ स्वर्ण पदक प्राप्त किए हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने 10 स्वर्ण पदक जीते हैं।
खिलाड़ी बोले : बेहतर प्रशिक्षण के जरिये पाया मुकाम
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो पहचान बना पाया हूं वो इस खेल मैदान और कोच की बदौलत है। देश के लिए खेलकर बेहद अच्छा महसूस होता है। कबड्डी में भी युवा अपना अच्छा कॅरिअर बना सकते हैं। -नितेश सांगवान, खिलाड़ी।
खेल में सफलता की पहली सीढ़ी आदमपुर खेल मैदान से चढ़ी है। यहां कोच के मार्गदर्शन में अभ्यास किया और आज राष्ट्रीय स्तर पर आठ और दक्षिण एशियाई खेल में एक पदक हासिल कर चुकी हूं।
- रितु, स्थानीय खिलाड़ी।
अभिभावक बोले- गांव स्तर पर प्रशिक्षण मिलने से हुई सुविधा
सरकार की ओर से इस खेल मैदान की शुरुआत की गई थी, लेकिन आज केवल आदमपुर गांव ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों के युवा भी यहां खेल प्रशिक्षण पाकर राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रहे हैं।
- भान सिंह, अभिभावक।
जिले के युवाओं को कबड्डी खेल में अग्रसर करने के लिए यह एक उत्तम मंच है। आज इस मंच के माध्यम से सैकड़ों युवा अपना भविष्य संवार चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है। - वेदपाल, अभिभावक।