हैदराबाद की शर्मनाक घटना से महिलाओं में आक्रोश है। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी इन महिलाओं का कहना है कि जब भी इस प्रकार की घटनाएं होती है तो लोग सड़कों पर आ जाते हैं और कुछ दिन बाद फिर भूल जाते हैं, समाज में कोई सुधार नहीं आता। ऐसे में लड़कियों को बहादुर एवं सशक्त बनने की जरूरत है। महिलाओं का कहना है कि आज युवाओं में बढ़ती नशाखोरी भी ऐसी घटनाओं का कारण बन रही है। , वहीं कई संगठनों ने प्रधानमंत्री के नाम महिलाओं की सुरक्षा संबंधी एसडीएम को सौंपा।
ऐसी घटनाएं समाज पर हैं धब्बा
महिलाओं के साथ इस प्रकार घटनाएं समाज पर धब्बा है। ऐसी अपराधी को फांसी की सजा देनी चाहिए। लड़कियों को आज बहादुर बनने की जरूरत है। ऐसी दोषी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। - डॉ. रीना, एसोसिएट प्रोफेसर
आज युवाओं को चाहिए कि वे नशे की लत से दूर रहे। नशा ऐसी घटनाओं का प्रमुख कारण बनता है। युवाओं को चारित्रिक शिक्षा की ज्यादा जरूरत है। इस पर बल दिए जाने जरूरत है तभी सोच में बदलाव आएगा। ऐसी दोषी को मौत की सजा मिलनी चाहिए। -डॉ. सुशीला, एसोसिएट प्रोफेसर
हैदराबाद की घटना देश को हिला देने वाली है। ऐसे दोषी लोगों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। आज लोगों को कानून का डर नहीं है। कानून सख्त होना चाहिए।समाज की सोच में भी बदलाव लाने की जरूरत है। संस्कारित शिक्षा पर ज्यादा बल देना चाहिए। -सोनिका, एसोसिएट प्रोफेसर
ऐसी घटनाओं से जुड़े अपराधियों की समाज की ओर से किसी प्रकार की पैरवी व परवरिश नहीं की जानी चाहिए। सरकार की ओर से सख्त फैसले लिए जाने की सख्त आवश्यकता है। ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई करते हुए दोषी को फांसी की सजा देनी चाहिए। -सुशीला सैनी, एसोसिएट प्रोफेसर
सरकार को चाहिए कि ऐसे मामलों में सख्त कानून बनाए और अपराधी को जल्द सजा मिले। आज युवा पीढ़ी को संस्कारित बनाने के लिए काम करने की जरूरत है। लोगों की सोच में बदलाव लाना जरूरी है। हैदराबाद की घटना बेहद शर्मनाक है। -डॉ. प्रीति गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर
6.समाज में ऐसी घटनाएं बेहद चिंता का विषय है। देश में महिलाओं के साथ इस प्रकार की घटनाएं होना शर्मनाक है। दोषी को फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए। ऐसे मामलों में किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। -डॉ. सुनीता, एसोसिएट प्रोफेसर
जब भी देश में ऐसी कोई घटना होती है लोग सड़कों पर मोमबत्ती लेकर आ जाते हैं कुछ बाद इसे भूला दिया जाता है, समाज में सुधार नहीं आता। लोगों को महिलाओं के प्रति अपनी सोच को बदलने की जरूरत है।
-डॉ. गरिमा, एसोसिएट प्रोफेसर
आज घर में भी महिला सुरक्षित नहीं है। समाज की सोच में बदलाव नहीं आ रहा है। महिलाओं के साथ बढ़ती ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कानून और सख्त बनाए जाने की जरूरत है। दोषी को फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए। -डॉ. अमिता, एसोसिएट प्रोफेसर