चरखी दादरी। कड़ाके की ठंड और गिरते तापमान ने लोगों के स्वास्थ्य पर भी काफी प्रभाव डाला है। विशेषकर महिलाओं में इस मौसम में रीढ़, जोड़ों के दर्द, घुटने, हाथों में दर्द आदि की समस्या काफी बढ़ रही है। इसके साथ ही लोग अब पेन किलर्स के बजाय फिजियोथेरेपी तकनीक को उपचार के लिए अधिक तवज्जो दे रहे हैं। यही कारण यह है कि दादरी के नागरिक अस्पताल में स्थित फिजियोथेरेपी ब्लॉक में हर रोज दर्जनों की संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार नागरिक अस्पताल के फिजियोथेरेपी ब्लॉक में हर रोज 60-70 मरीज आ रहे हैं, इनमें करीब 70 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
ये हैं मुख्य कारण
दादरी नागरिक अस्पताल में तैनात फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. लोकेश मलिक के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाएं जोड़ों व कमर के दर्द की समस्या से अधिक ग्रस्त हैं। उन्होंने बताया कि समय पर भोजन का सेवन न करना, समय पर नींद न लेना इस समस्या के बड़े कारण हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आने वाली महिलाएं बताती हैं कि वे काफी समय अचार के साथ ही रोटी खाती हैं। ऐसे में पौष्टिक आहार के साथ-साथ दूध-घी से दूरी बनाने के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उन्हें जोड़ों व कमर दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
लंबे समय तक दर्द निवारक गोलियों का न करें सेवन
डॉ. लोकेश मलिक ने बताया कि काफी महिलाएं ऐसी भी होती हैं जो जोड़ों या कमर दर्द होने पर लंबे समय तक पेन किलर्स का सेवन करती हैं। लंबे समय तक पेन किलर्स खाने के कारण बच्चेदानी में दिक्कत आ जाती है और कई मामलों में चिकित्सक बच्चादानी निकलवाने तक की सलाह दे देते हैं। बच्चादानी निकलने के बाद शरीर में हार्मोंस नहीं बन पाते और उन महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में महिलाएं ज्यादा लंबे समय तक दर्द निवारक गोलियों का सेवन करने के बजाय समय पर चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार करवाएं।
दवाओं से दूरी, फिजियोथेरेपी से नजदीकी
आधुनिक जीवनशैली में लोग अब दवाओं के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए प्राकृतिक और तकनीकी उपचार को अपना रहे हैं। फिजियोथेरेपी ब्लॉक में डॉ. लोकेश मलिक काइरोप्रैक्टिक तकनीक के माध्यम से मरीजों का उपचार करते हैं। डॉ. मलिक के अनुसार दवाएं केवल दर्द को दबाती हैं, जबकि फिजियोथेरेपी जकड़न को खत्म कर मांसपेशियों को लचीला बनाती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
डॉ. लोकेश मलिक ने बताया कि महिलाएं ठंड में सीधे ठंडे पानी के संपर्क से बचें। हाथ-पैर और जोड़ों को गर्म रखें। विटामिन-डी की कमी हड्डियों को कमजोर करती है, इसलिए सुबह की धूप जरूर लें। झुककर भारी सामान न उठाएं और बैठते समय अपनी कमर सीधी रखें। घर पर व्यायाम आदि करें।
ठंड के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे जोड़ों तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। महिलाएं अक्सर अपने दर्द को नजरअंदाज करती हैं, जो बाद में गंभीर समस्या बन जाती है। दर्द शुरू होते ही चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार करवाएं।
-डॉ. लोकेश मलिक, फिजियोथेरेपिस्ट, नागरिक अस्पताल।