गांव मकड़ानी स्थित हनुमान मंदिर वाला जोहड़।
चरखी दादरी। मैं गांव मकड़ानी का जोहड़ हूं। मुझे बने हुए 250 साल से भी ज्यादा हो चुके हैं। मेरे किनारे पर भगवान हनुमान का एक छोटा सा मंदिर भी है। मेरे किनारे पर बनी कुई का मीठा पानी दो सदी से ग्रामीणों की प्यास बुझा रहा है। मेरे में वर्षभर पर्याप्त मात्रा में पानी रहने के कारण यहां पर काफी सारे पेड़ पौधे हैं, जिससे यहां हरियाली रहती है।
हम बात कर रहे हैं गांव मकड़ानी के जोहड़ की। जो अब बारिश के कारण पानी से भरा हुआ है। आवश्यकता पड़ने पर जोहड़ में माइनर से पानी डाला जाता है। ग्राम पंचायत ने जोहड़ के सुंदरीकरण के लिए प्रदेश सरकार के पास प्रस्ताव भेज हुआ है ताकि मनरेगा के तहत इसका करवाया जा सके। गांव के सरपंच सचिन कुमार ने बताया कि यह जोहड़ पुराना इतिहास समेटे हुए हैं। जोहड़ के पास ही हनुमान व दादा भैया का मंदिर बना हुआ है। दादा भैया के प्रति लोगों में काफी आस्था है। सरपंच ने बताया कि जोहड़ में पानी सूखने पर माइनर से भर दिया जाता है। अब तो बारिश से जोहड़ फिलहाल लबालब है। इस जोहड़ के किनारे एक कुई बनी है इसका पानी काफी मीठा है। कुई के समीप टंकी भी बनाई हुई है। जिससे लोग पानी भर लेते हैं। कुई में मीठा पानी होने का कारण जोहड़ ही है। जोहड़ के चारों ओर हिंदोक व वट वृक्ष हैं जिससे आसपास का वातावरण हरा भरा बना रहता है। जोहड़ की चाहरदीवारी का भी निर्माण करवाया हुआ है। देखने पर यह प्राकृतिक स्थल जैसा लगता है। इस जोहड़ में गांव का दूषित पानी नहीं डाला जाता। यही वजह है कि इसके पानी में गुणवत्ता बनी हुई है। पशुपालक इसमें मवेशियों को पानी पिलाते हैं।