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जिले में 1000 बेटों पर 868 बेटियां होना चिंताजनक : डॉ. जयेंद्र

Fri, 14 Jul 2023 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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चरखी दादरी। जिले में 1000 बेटों पर 868 बेटियां ही जन्म ले रही हैं। गिरता लिंगानुपात चिंता का विषय है और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में दादरी जिले की वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है। यह बात अतिरिक्त उपायुक्त डाॅ. जयेंद्र सिंह ने वीरवार को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान समिति की बैठक में कही। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाकर ही बेटियों की जन्मदर को बढ़ाया जा सकता है। महिलाओं को स्वयं इस दिशा में आगे आना होगा।
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अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि रूढ़ीवादी मानसिकता को त्याग कर बेटा-बेटी में फर्क करना छोड़ दें, यह बात हर परिवार को समझनी होगी। कोई भी बेटी परिवार पर बोझ नहीं होती, बल्कि बेटियों के बिना परिवार अधूरा रहता है। डाॅ. जयेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा पुलिस विभाग कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए एक मजबूत अभियान चलाएं। कोई भी गर्भवती महिला भ्रूण जांच के लिए घर से बाहर निकलती है तो इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग या पुलिस विभाग को दें। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।

अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जबरन करवाए गए गर्भपात से स्त्री की शारीरिक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव होता है। उन्हें किसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने डीएसपी सुभाषचंद्र को निर्देश दिए कि दादरी में गर्भ जांच करवाने वाले गिरोह का सुराग लगाकर सख्त कार्रवाई की जाए। स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ डा. नरेंद्र कुमार ने बताया कि इस साल में पीएनडीटी एक्ट के तहत तीन रेड की जा चुकी हैं। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी कृष्णा फौगाट, जिला सांख्यिकी अधिकारी अनीता, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी संदीप सिंह, सुपरवाइजर सुमनलता, विकास सांगवान, रिंकू आदि उपस्थित रहे।
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- जनजागरूकता अभियान चलाएगा प्रशासन
बैठक में निर्णय लिया गया कि बेटियों के प्रति लोगों की सोच को बदलने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जो गांव लड़कियों की जन्मदर को बढ़ाएंगे, उनको जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी गीता सहारण ने बताया कि दादरी में 38 गांव ऐसे हैं, जहां बेटियों की संख्या प्रति हजार लड़कों के मुकाबले पांच सौ से भी कम है। इसके अलावा 68 गांवों में बेटियों की संख्या एक हजार से अधिक है।
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