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Charkhi Dadri News: पुलिस ऑफिसर बुआ की टोपी पहनकर कहती थीं इशिता-आपसे बड़ी अधिकारी बनूंगी

Wed, 04 Jun 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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शिता के साथ फोटो खींचवाते ग्रामीण। संवाद
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पुश्तैनी घर पर पहुंचने के बाद माता-पिता, भाई, ताऊ व बुआ धर्मली देवी और पपीला देवी के साथ इशिता सांगवान। संवाद
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पगड़ी पहनाकर बेटी इशिता सांगवान का सम्मान करते गांव के बुजुर्ग। संवाद
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बाबा जमुना दास मंदिर में परिजनों के साथ पूजा करतीं इशिता सांगवान। संवाद
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संस्कार....पुश्तैनी घर में प्रवेश करने से पहले दहलीज छूतीं इशिता सांगवान। संवाद
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पैतृक गांव के मंदिर में महंत से आशीर्वाद लेतीं इशिता। संवाद
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इशिता के साथ फोटो खिंचवाते ग्रामीण। संवाद
- इशिता की बुआ धर्मली देवी हैं भिवानी महिला थाना प्रभारी, पैतृक गांव लौटने पर बुआ ने सेल्यूट कर एनडीए के जरिये देश की पहली महिला पयालट बनी भतीजी का किया स्वागत
- छपार पहुंचीं इशिता सांगवान बोलीं बुआ से मिली प्रेरणा तो माता-पिता का मार्गदर्शन आया काम

चरखी दादरी। प्रत्येक माता-पिता चाहते हैं कि बचपन में उनका बच्चा बड़ा अधिकारी बनने का सपना देखे और बड़ा होकर इसे पूरा भी करे। अगर यह चाहत पूरी हो जाए तो फिर क्या कहने। छपार गांव की होनहार बेटी इशिता सांगवान ने इसकी बानगी पेश की है। उन्हें एनडीए के जरिये देश की पहली महिला पायलट बनने का गौरव हासिल हुआ है।
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इशिता साढ़े तीन वर्ष की उम्र तक दादी के पास पैतृक गांव रहीं। उस दौरान उनकी जुड़वां बहन आस्था माता अनीता देवी व पिता चरण सिंह सांगवान के साथ नांगल में रहीं। इशिता की बुआ धर्मली देवी पुलिस विभाग में हैं। उनकी मौजूदा पोस्टिंग भिवानी महिला थाना में है।
परिजनों के अनुसार, धर्मली देवी जब पुलिस की वर्दी में मायके आती थीं तो इशिता उनकी टोपी पहनकर कहती थीं कि बुआ से भी बड़ी अधिकारी बनूंगी। धर्मली देवी ने मंगलवार को बताया कि भतीजी ने बचपन में कही बात सच करके दिखा दी। भतीजी की कामयाबी की खुशी में बुआ ने सेल्यूट कर इशिता का गांव पहुंचने पर स्वागत किया। वहीं, इशिता की दूसरी बुआ पपीला देवी रिटायर्ड शिक्षिका हैं। वह रोहतक में रहती हैं।
पिता चरण सिंह सांगवान ने बताया कि इशिता ने जब एनडीए पास किया, उस दौरान वह साढ़े 19 वर्ष की थी। अब साढ़े 22 साल है। उन्होंने बताया कि तीन साल के प्रशिक्षण के दौरान इशिता सांगवान को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में पांच स्वर्ण और एक रजत पदक जीतने पर बेस्ट महिला एथलीट का खिताब भी मिला है। पढ़ाई के साथ खेल से इशिता का बचपन से जुड़ाव रहा है।
- तीन साल बाद गांव लौटने पर सीधे मंदिर पहुंचीं इशिता
मंगलवार सुबह करीब पौने नौ बजे इशिता सांगवान अपने पिता चरण सिंह सांगवान, मां अनीता सांगवान, भाई आर्यन सांगवान के साथ पैतृक गांव छपार पहुंचीं। वह सीधे गांव के बाबा जमुना दास मंदिर पहुंचीं। वहां उन्होंने ताऊ आजाद सिंह सांगवान की अगुवाई में परिजनों के साथ पूजा की। इसके बाद महंत से आशीर्वाद लिया।

- पुश्तैनी मकान में प्रवेश करने से पहले झुककर जमीन को छुआ
बाबा जमुना दास मंदिर में पूजा करने के बाद इशिता परिजनों के साथ अपने पुश्तैनी मकान में पहुंचीं। यहां पहुंचते ही उन्होंने पहले झुककर जमीन को छुआ और फिर अंदर प्रवेश किया। इशिता बोलीं कि मकान को देखकर बचपन की यादें ताजा हो गईं। यहां मैंने दादी के साथ साढ़े 3 साल बिताए हैं।

- बुजुर्गाें ने पहनाई पगड़ी, युवाओं ने खिंचवाया फोटो
दादरी पंचायत समिति के वाइस चेयरमैन प्रतिनिधि नरदव सांगवान उर्फ टोनी के आवास पर गांव के मौअजिज लोगों ने इशिता सांगवान का स्वागत किया। यहां बुजुर्गाें ने इशिता को पगड़ी पहनाई जबकि युवाओं ने इशिता के साथ फोटो खिंचवाया। इशिता ने कहा कि सफलता पाने के चक्कर में लोग अपने पैतृक गांव और वहां के लोगों से मेल-मिलाप छोड़ देते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

- पिता बोले- बेटी रफ-टफ है, हासिल की बड़ी उपलब्धि
इशिता सांगवान के पिता चरण सिंह सांगवान शिक्षक हैं। उन्होंने कहा कि बेटी इशिता रफ-टफ है। पढ़ाई के साथ खेल से भी जुड़ाव है। वह अच्छी घुड़सवार, तैराक व बास्केटबॉल खिलाड़ी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने बेटी को इतिहास रचने का अवसर दिया, जिसे उसने बखूबी भुनाया।

- मां बोलीं- बेटी ने पहले प्रयास में सफलता पाई, बेहद खुशी
इशिता की मां अनीता सांगवान भी शिक्षिका हैं। उन्होंने कहा कि बेटी ने पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर इतिहास रच दिया। इसकी बेहद खुशी है। करीब 1,68,000 बेटियों ने एनडीए लिखित परीक्षा दी थी। उनमें से 1,02,000 उत्तीर्ण हुईं। अंतिम पड़ाव तक 19 बेटियां पहुंचीं। इनमें से 17 हाल ही में पासआउट हुईं।

- कोविड में प्रभावित हुई तैयारी, घर पर रखा प्रयास जारी
पिता चरण सिंह सांगवान ने बताया कि कोविड के समय इशिता कोटा में थी। उस दौरान घर आना-जाना लगा रहा। हालांकि, इशिता ने घर पर अपनी तैयारी जारी रखी। चरण सिंह सांगवान ने बताया कि दूसरी बेटी आस्था सूरत से एमबीबीएस कर रही है जबकि बेटा आर्यन अब ग्रेजुएशन पूरी करेगा।
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- परिश्रम सफलता की कुंजी, यह बात सही : इशिता
बातचीत में इशिता सांगवान ने बताया कि बचपन में पढ़ा था कि परिश्रम सफलता की कुंजी है। आज महसूस कर रही हूं कि यह बात सही है। अगर कोई भी बेटी लग्न से निर्धारित लक्ष्य को पाने का प्रयास करे तो वह आसानी से इसे पूरा कर घर, परिवार, गांव, जिला, प्रदेश व देश का नाम रोशन कर सकती है।
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