विधानसभा और लोकसभा सीटों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से दादरी जिले के राजनैतिक समीकरण भी बदल जाएंगे। दादरी जिले में दादरी और बाढड़ा दो विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से 56 साल के राजनीतिक इतिहास में दादरी हलके से आज तक कोई महिला विधायक नहीं बनी है। वहीं, बाढड़ा की बात करें तो तीन महिला विधायक अब तक बनी हैं।
वर्ष 1967 से लेकर 2019 तक की बात करें तो दादरी और बाढड़ा हलके से 13-13 विधायक चुने गए हैं। ओवरऑल बात करें तो दोनों हलकों से ज्यादातर पुरुष ही विधानसभा में पहुंचे हैं। दादरी हलके से तो आज तक किसी महिला को विधानसभा में जाने का अवसर तक नहीं मिला है जबकि बाढड़ा हलके से वर्ष 1972, 1982 और 2019 में महिला विधायक चुनी गई हैं।
वर्ष 1967 से 2019 तक दादरी हलके से बने विधायक
वर्ष विजेता पार्टी प्राप्त मत
- 1967 गणपतराय कांग्रेस 13782
- 1968 गणपतराय कांग्रेस 11864
- 1972 गणपतराय एनसीओ 17922
- 1977 हुकम सिंह जेएनपी 14449
- 1982 हुकम सिंह लोकदल 20943
- 1987 हुकम सिंह लोकदल 25677
- 1991 धर्मपाल हविपा 20918
- 1996 सतपाल हविपा 33690
- 2000 जगजीत एनसीपी 23943
- 2005 नृपेंद्र सिंह कांग्रेस 29164
- 2009 सतपाल हजकां 22790
- 2014 राजदीप फौगाट इनेलो 43400
- 2019 सोमबीर सांगवान निर्दलीय 43849
पिछले 56 साल का ये है बाढड़ा विधानसभा क्षेत्र का इतिहास
वर्ष - विजेता - पार्टी - प्राप्त मत
- 1967 - अत्तर सिंह - निर्दलीय - 15003
- 1968 - अमीर सिंह - बीएचपी - 11460
- 1972 - लज्जा रानी - कांग्रेस - 21591
- 1977 - रणसिंह मान - जेएनपी - 17423
- 1982 - चंद्रावती - लोकदल - 21905
- 1987 - रणसिंह मान - लोकदल - 31279
- 1991 - अत्तर सिंह - हविपा - 29250
- 1996 - नृपेंद्र सिंह - हविपा - 42142
- 2000 - रणबीर सिंह - इनेलो - 25205
- 2005 - धर्मबीर सिंह - कांग्रेस - 42981
- 2009 - रघुबीर सिंह - इनेलो - 34280
- 2014 - सुखविंद्र मांढ़ी - भाजपा - 39139
- 2019 - नैना चौटाला - जजपा - 52809
राजनेता बोलीं- महिलाओं को भी राजनीति में आने का पूरा हक
जजपा तो इसकी पक्षधर रही है। यही कारण है कि महिलाओं को पहले पंचायत चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण दिलाया गया और इसका परिणाम ये है कि आज हर दूसरे गांव की सरपंच महिला है। इसके बाद राशन डिपो में महिलाओं को 33 प्रतिशत कोटा दिया गया। अब विधानसभा में महिलाओं को कोटा मिलने के लिए प्रयास सराहनीय है और इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। -नैना चौटाला, विधायक, बाढड़ा
महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्हें भी हर क्षेत्र में आगे आने का हक है। विधानसभा और लोकसभा में जाकर महिला वर्ग की आवाज को बुलंद कर पूरा करवाने में आसानी होगी। जो नई व्यवस्था लागू होगी उसके अनुसार सोच-समझकर हलकों का चयन किया जाना चाहिए। मेरा मानना है कि उन हलकों को प्राथमिकता दी जाए जहां से आज तक कोई महिला विधायक नहीं बनी है। -मनीषा सांगवान, कांग्रेस प्रवक्ता एवं महिला विंग प्रदेश महासचिव
भाजपा शुरुआत से ही महिलाओं को आगे लाने के लिए अहम फैसले ले रही है। पहले महिलाओं को ग्राम पंचायतों में और उसके बाद राशन डिपो में आरक्षण दिया गया। अब विधानसभा और लोकसभा में भी 33 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला स्वागत योग्य है। महिलाओं को राजनीति में आने का पूरा हक है और उन्हें ये मौका मिलना बेहद जरूरी है। सरकार के इस निर्णय से महिलाएं और सशक्त होंगी। -सुनीता दांगी, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा महिला मोर्चा