चरखी दादरी। अटेला कलां निवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान सिंह ने भी आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया। देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करवाने के लिए भगवान सिंह को भी अन्य आजादी के अन्य मतवालों की तरह जेल जाना पड़ा। इस कुर्बानी की बदौलत उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हाथों सम्मान भी मिला। अटेला कलां के किसान परिवार में जन्म लेकर देश की आजादी में अपना योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानी भगवान सिंह जुझारू सैनिक के साथ अच्छे पहलवान भी थे। भगवान सिंह का जन्म 1917 में हुआ था। उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजादी हिंद फौज में रहते हुए अंग्रेजी सरकार की नींद हराम कर दी थी। 19 अक्तूबर 1935 को उन्होंने ब्रिटिश आर्मी ज्वाइन की। बाद में 1942 में नेताजी के आह्वान पर ब्रिटिश आर्मी छोड़कर आजाद हिंदी फौज में शामिल हो गए।
उनको सराहनीय सेवा के लिए अफ्रीका स्टार, 1936-45 स्टार के अलावा वार मेडल मिला। अंग्रेजी सेना से लड़ते हुए उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वे कई बार जेल भी गए। 1946 में वे गांव अटेला कलां लौट आए। इसके बाद भगवान सिंह की मनभरी देवी के साथ शादी हो गई। उनके तीन बेटे व पांच बेटियां हैं। आजादी के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में प्रचार-प्रसार किया। बच्चों को स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित किया। गांव के राजकीय स्कूल का नामकरण उनके नाम से किया हुआ है।
- इंदिरा गांधी के हाथों मिला सम्मान
भगवान सिंह को विशिष्ट सेवाओं के लिए इंदिरा गांधी के हाथों ताम्रपत्र मिला हुआ है। उन्हें हरियाणा सरकार की ओर से भी सम्मानित किया गया है। सात मई 2006 को उन्होंने अंतिम सांस ली थी। उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था।