चरखी दादरी। हिंदी साहित्य प्रचार सभा और आओ कविता करना सीखे समूह के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। दिल्ली की वरिष्ठ साहित्यकार राधा गोयल मुख्य अतिथि व राजस्थान की कवयित्री आशा पांडे ओझा कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में शामिल हुईं।
सभा अध्यक्ष रोशनी शर्मा के सानिध्य एवं महासचिव जितेंद्र गोयल के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन अनिल शर्मा चिंतक ने किया। गोष्ठी की शुरुआत फतेहाबाद की कवयित्री सुमनलता ने शारदे वंदना से की। झारखंड के विधुभूषण मंडल ने अपनी कविता द्वारा भारत मां का जयघोष किया।
युवा कवयित्री स्वाति चौरसिया ने करो दया भरो प्रकाश दिव्य मात शारदे से मात शारदे का अभिनंदन किया। कविता मधुर ने धरती पर सबसे प्यारा यह मेरा हिंदुस्तान कविता के माध्यम से देश प्रेम की बात की। जिले सिंह ने शोणित से भर भर खत लिखता रचना के माध्यम से शहीद का अंतिम खत सुनाया। गजेंद्र रोहिल्ला ने धर्म आधारित भेदभाव पर कटाक्ष किया।
ग्वालियर मध्य प्रदेश के वरिष्ठ कवि रामलखन शर्मा ने रोक नहीं पाते जब अपनी इन आंखों का पानी हम तब घायल घाटी की लिखते करुणाभरी कहानी हम से कश्मीर घाटी के जख्मों के भरने की दास्तां सुनाई। डॉ. अनिता भारद्वाज ने जब भाव पावनता का मन गंगा से लगता है रचना से सबको भाव विभोर कर दिया।
युवा कवयित्री खुशबू ने बेटियों की असुरक्षा पर कटाक्ष करते हुए नूंह की घटना की निंदा की। डॉ. रमाकांत शर्मा ने जय हो देश हमारे जय हो गीत से देश की गौरव गाथा सबको सुनाई। दिल्ली की वरिष्ठ कवयित्री एवं कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राधा गोयल ने आजादी के बाद भी हमको देश बचाना होता है रचना के माध्यम से देश की आजादी को बरकरार रखने की गुहार लगाई।
आयोगेश समदर्शी ने अपनी रचना के माध्यम से मित्रता एवं रिश्ते नातों की बढ़ती उपेक्षा पर कटाक्ष किया। आशा पांडे ने मन के विचलित इस मौसम में कुंदन फूल सजाऊं कैसे के माध्यम से जीवन को घेरती निराशाओं का जिक्र करते हुए उनसे पार पाने की राह दिखाई। इनके अलावा अनूप अंजान व विकास चौधरी भी उपस्थित रहे। सभा अध्यक्ष रोशनी शर्मा ने सबका धन्यवाद किया।