चरखी दादरी के गांव चरखी में धान रोपाई पर प्रतिबंध लगाने के विरोध में दायर की गई याचिका पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए चार अगस्त तक जवाब मांगा है। याची के अधिवक्ता दीपक सांगवान ने बताया कि धान रोपाई को लेकर दो जुलाई को चरखी में पंचायत आयोजित हुई थी, जिसमें धान रोपाई करने वाले किसानों का सामाजिक बहिष्कार करने का तुगलकी फरमान सुनाया गया था।
गांव चरखी के मैन चौक पर हुई पंचायत में धान लगाने वाले किसानों का सामाजिक बहिष्कार, हुक्का पानी बंद, खुशी गम में शामिल न होने और गांव के किसी भी दुकान से सामान लेने पर पाबंदी लगाने का निर्णय लिया गया था।
चरखी गांव के आसपास के गांव पैंतावास कलां, अख्तयारपुरा, मानकावास, खेड़ी, पांडवान, साहुवास, फतेहगढ़ व घिकाड़ा में भी धान की खेती की गई है। चरखी में भी बहुत से किसान परिवार धान की फसल रोपाई करना चाहते हैं। हालांकि 80 प्रतिशत किसान इस तुगलकी फरमान से डरकर आगे नहीं आ रहे हैं।
अधिवक्ता दीपक सांगवान ने बताया कि धान लगाने वाले किसान कुलदीप व विनोद ने उच्च न्यायालय चंडीगढ़ में पंचायत के फरमान को लेकर याचिका दायर की थी। याचिका पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने सांगवान खाप के प्रधान व दादरी विधायक सोमबीर सांगवान, चरखी गांव के सरपंच भूपेंद्र, सुरेश पहलवान, बल्लू, धर्मेंद्र, विनय, सदर एसएचओ को याचिका का जवाब देने के लिए 4 अगस्त को उच्च न्यायालय में पेश होने का समन जारी किया है।