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गर्भपात करने की सूचना पर प्राइवेट क्लीनिक में जांच-पड़ताल

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क्लीनिक के अंदर जांच करती टीम। - फोटो : CharkhiDadri
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क्लीनिक में गर्भपात होने की सूचना पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो घंटे तक जांच पड़ताल की। जांच के दौरान यहां न तो कोई गर्भवती मिली और न ही गर्भपात संबंधी दवाएं अथवा औजार। देर शाम तक फार्मेसी के स्टॉक की जांच की जा रही थी।
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नोडल अधिकारी डॉ. नरेंद्र ने बताया कि सोमवार को स्वास्थ्य विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि चरखी दरवाजा स्थित शांति मेटरनिटी होम पर लकड़ी का गर्भपात करवाया जाना है। उक्त लड़की तीन माह की प्रेग्नेंट है। इसके आधार पर डॉ. नरेंद्र और डॉ. सुनैना को टीम सहित मौके पर जांच करने के लिए भेजा गया। इस कार्रवाई के लिए बीडीपीओ सुभाषचंद को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिटी थाना पुलिस की भी मदद ली।
सोमवार को 4 बजे का क्लीनिक का निरीक्षण शुरू किया। 5: 30 बजे तक टीम ने पूरे क्लीनिक की अच्छे से जांच की लेकिन कहीं कोई प्रतिबंधित दवा या गर्भपात में प्रयोग होने वाले औजार बरामद नहीं हुए। डॉ. नरेंद्र ने बताया कि ड्रग्स इंस्पेक्टर ने मौके पर पहुंचकर क्लीनिक के दवाओं के स्टॉक की भी जांच की। वहीं, क्लीनिक संचालक डॉ. राजेश ने बताया कि उन्हें बदनाम करने की नीयत से किसी ने ऐसा किया है। उनके क्लीनिक के बारे में झूठी सूचना विभाग को दी गई है। इससे पहले पिछले चार माह के अंदर स्वास्थ्य विभाग गर्भपात कराने वाले दो गिरोह का भंड़ाफोड़ कर चुका है। वहीं, एमटीपी कीट बेचने पर एक मेडिकल स्टोर भी सील किया गया था। गर्भपात कराने वाले जो दो गिरोह पहले पकड़े गए हैं उनके तार झांसी और दिल्ली से जुड़े मिले थे। उनके खिलाफ मामला भी दर्ज कराया गया था।
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बेड के गद्दे से लेकर छत की टंकी तक खंगाली
क्लीनिक पर दबिश देने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ ड्यूटी मजिस्ट्रेट सहित आठ महिला और पुरुष पुलिसकर्मी मौजूद रहे। टीम ने पूरी बिल्डिंग की तलाशी ली। पहली मंजिल पर रखे गद्दों के अलावा टीम ने छत पर बनी पानी की टंकी की भी जांच की। इसके अलावा क्लीनिक में बने स्टोर सहित अन्य जगहों की भी गहनता से जांच की गई लेकिन टीम को कहीं कुछ नहीं मिला।
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हमें सूचना मिली थी कि यहां किसी तीन माह की गर्भवती लड़की का गर्भपात करवाया जाना था। जांच के दौरान क्लीनिक पर ऐसा कुछ नहीं पाया गया।
डॉ. नरेंद्र, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग
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