सरकार कोरोना काल में भी चरखी दादरी जिला अस्पताल के अलावा मातृ-शिशु अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ तैनात नहीं कर पाई है। ऐसे में जिले की साढ़े पांच लाख की आबादी को मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा। जिला अस्पताल में ईएनटी, आई, सर्जन, पीडिट्रिशियन, ऑरथो सहित सर्जन के पद खाली पड़े हैं। हर माह सरकार को डिमांड भेजी जाती है लेकिन अब तक विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो पाई। विशेषज्ञों के पद खाली होने से सरकारी स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तरह ही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि लगातार डिमांड भेजी जा रही है और जल्द ही तैनाती होने की संभावना है।
चरखी दादरी में जिला अस्पताल के अलावा तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 14 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हेल्थ वेलनेस सेंटर बनाने की प्लानिंग थी जो कोरोना काल की भेंट चढ़ी हुई है। कोरोना संक्रमण फैलने से पहले भी चरखी दादरी जिले में एक भी विशेषज्ञ तैनात नहीं था। हालांकि संक्रमण फैलते ही जिले को दस नए चिकित्सक मिले थे जिनमें से पांच ने ही उस समय ज्वाइन किया था। इससे पहले जिले में स्वीकृत चिकित्सकों के 91 में से 56 पद खाली पड़े थे।
जिला बनने के बाद से ही जिला मुख्यालय अस्पताल सहित मातृ-शिशु अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञों की तैनाती का इंतजार है। वहीं, जनप्रतिनिधि भी मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के सामने कई बार ये समस्याएं रख चुके हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो पा रही।
1100 से पार है जिले की दैनिक ओपीडी
जिला अस्पताल में सामान्य दिनों में औसतन ओपीडी 500 से 550 रहती है। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दैनिक ओपीडी 60 से 70 रहती है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की दैनिक ओपीडी 20 से 25 रहती है। इस लिहाज से जिले में राजकीय स्वास्थ्य केंद्रों की दैनिक ओपीडी 1100 से पार रहती है।
मामूली फ्रेक्चर होने पर होती भागदौड़
जिले में ऑरथो स्पेशलिस्ट का पद भी खाली है। हल्के फ्रेक्चर में ही एक्स-रे के बाद मरीज को भिवानी सिविल अस्पताल या रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। मरीज के साथ-साथ तीमारदारों को भी इसके चलते परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। जिले में ऑरथो की तैनाती की सख्त जरूरत बनी हुई है।
बाक्स: 70 हजार बच्चों पर नहीं एक भी बाल रोग विशेषज्ञ
जिले में 18 साल तक की उम्र के लोगों की संख्या करीब एक लाख 20 हजार है। इनमें करीब 70 हजार बच्चे हैं। इसके बावजूद जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिले में बच्चों का उपचार पूरी तरह निजी अस्पतालों पर निर्भर है और इसके बदले परिजनों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
ये है स्वास्थ्य सेवाओं और जिले से संबंधित आंकड़ा
जनसंख्या- 5.50 लाख
गांव- 172
जीएच- 1
एमसीएच-1
सीएचसी-3
पीएचसी-14
चिकित्सकों के पद-91
चिकित्यकों की संख्या- 35
चिकित्सकों के खाली पद- 56
एमओ के खाली पद-5
डिप्टी सीएमओ के पद-12
डेंटल सर्जन के खाली पद-53
पांच पीएचसी और तीन सीएचसी में नहीं 21 मेडिकल ऑफिसर
बौंदकलां, गोपी और झोझूकलां गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके अलावा 14 गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन सभी पर चिकित्सकों की कमी है। कादमा, गोपी, रानीला, माई कलां, रानीला, मानकावास पीएचसी पर एमओ के पद खाली पड़े हैं। पांच पीएचसी और तीन सीएचसी में एमओ के 21 पद खाली हैं।
बाक्स: सांसद बोले- मुख्यमंत्री से करूंगा बात, चरखी दादरी जिले में होगी विशेषज्ञों की तैनाती
सांसद धर्मवीर सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि चरखी दादरी जिले में विशेषज्ञों की तैनाती बड़ी समस्या है। हमने पहले भी डिमांड भेजी है और स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ मैं खुद मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री से इस संबंध में बात करूंगा। भर्ती की अगर कोई रास्ता संभव हुआ तो वो भी निकलवाया जाएगा। जिले में जल्द से जल्द विशेषज्ञों की तैनाती करवा दी जाएगी।
विशेषज्ञों की तैनाती के लिए डिमांड लगातार भेजी जा रही हैं। उम्मीद है कि सरकार जल्द तैनाती कर देगी। इसके तुरंत बाद स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ा दिया जाएगा।
डॉ. मंजू कादयान, सीएमओ, चरखी दादरी