स्वास्थ्य विभाग का सिविल अस्पताल के नए भवन की पहली मंजिल पर मेडिकल बोर्ड कक्ष शिफ्ट करना हरियाणा दिव्यांगजन आयुक्त राजकुमार मक्कड़ को नागवार गुजरा। मंगलवार को एक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे आयुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। इसके साथ ही वीरवार से पहले मेडिकल बोर्ड कक्ष को वापस सिविल अस्पताल के पुराने भवन में प्रथम तल पर ही स्थानांतरित करने के आदेश दिए। ऐसा न करने की सूरत में अधिकारियों को जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। स्वयं आयुक्त ने मौके पर इस संबंध में चेतावनी भी दी।
हरियाणा दिव्यांगजन आयुक्त राजकुमार मक्कड़ मंगलवार सुबह 11 बजे सिविल अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के मुख्य द्वार पर दिव्यांगों ने उनसे मुलाकात की और परेशानियों से अवगत करवाया। इसके बाद दिव्यांग आयुक्त को सीधे अस्पताल के पुराने भवन के कमरा नंबर 14 में ले गए। यहां पहले मेडिकल बोर्ड बैठता था। दिव्यांगों ने आयुक्त राजकुमार मक्कड़ को बताया कि जिला स्वास्थ्य विभाग की मनमानी से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नए भवन की पहली मंजिल तक पहुंचने में दिव्यांगों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है।
इन पर आयुक्त ने कोरोना नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. गौरव भारद्वाज को तलब कर लिया। आयुक्त ने सख्त लहजे में कहा कि मेडिकल बोर्ड कक्ष को प्रथम तल की बजाय पहली मंजिल पर शिफ्ट करना दिव्यांगों का शोषण है। बाकयदा इस संबंध में कानून भी बना है और ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि दादरी सिविल अस्पताल में प्रत्येक वीरवार को मेडिकल बोर्ड बैठता है और इस वीरवार को पुराने भवन के प्रथम तल पर कमरा नंबर 14 में ही मेडिकल बोर्ड को बैठाया जाएगा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को जुर्माना और दंड़ात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। निरीक्षण के दौरान दिव्यांगों ने आयुक्त राजकुमार मक्कड़ को ज्ञापन भी सौंपा।
मजिस्ट्रेट की पावर भी है मेरे पास...
आयुक्त राजकुमार मक्कड़ सिविल अस्पताल में कुछ व्यवस्थाओं से वे संतुष्ट भी नजर आए। उन्होंने अस्पताल के गेट के समीप रखी व्हील चेयरों की जांच भी की और सभी चेयर दुरुस्त पाई गईं। इस पर उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की पीठ भी थपथपाई। आयुक्त ने मेडिकल बोर्ड शिफ्टिंग के कदम को गलत बताते हुए कहा कि मेरे पास आयुक्त और मजिस्ट्रेट दोनों की पावर है। चूक न सुधारने पर अधिकारी जुर्माना और कार्रवाई का सामने करने के लिए तैयार रहे।
बाहर से फाइल खरीदने को मजबूर किए जा रहे दिव्यांग
दिव्यांगों ने बताया कि पहले सिविल अस्पताल में ऑल हरियाणा विकलांग संघ का कार्यालय था। मेडिकल बनवाने के लिए पहुंचने वाले दिव्यांगों को यहां से फार्म निशुल्क दिया जाता था, लेकिन दो माह पहले विभागीय अधिकारियों ने यह कार्यालय बंद करवा दिया। इसके बाद से ही दिव्यांग बाहर जाकर 50 रुपये की फाइल खरीदने को विवश हैं। आयुक्त ने कहा कि यह भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। इस मामले की भी जांच की जाएगी।
सर, तीन साल से चिकित्सक नहीं दे रहा दिव्यांगता रिपोर्ट
नौरंगाबास निवासी एवं ऑल हरियाणा विकलांग संघ महिला विंग जिला प्रधान आशा ने आयुक्त से कहा कि 2018 में उसका मेडिकल हुआ था। तीन साल बाद भी चिकित्सक दिव्यांगता की रिपोर्ट नहीं दे रहा। पांच मई को कोर्ट में उसके मामले की सुनवाई है। इस पर संज्ञान लेकर आयुक्त ने डिप्टी सीएमओ को दिव्यांग आशा की समस्या का समाधान कराने के आदेश दिए।
विशेषज्ञों की कमी के चलते रेफर करने पड़ रहे दिव्यांग
हरियाणा दिव्यांगजन आयुक्त ने सिविल अस्पताल में दिव्यांगों के लिए की गईं व्यवस्थाओं के बारे में पूछा तो विशेषज्ञों की कमी की बात सामने आई। डिप्टी सीएमओ ने बताया कि ईएनटी न होने के कारण दिव्यांगों को मेडिकल जांच के लिए बीपीएस खानपुर रेफर करना पड़ रहा है। आयुक्त ने विशेषज्ञों के अन्य खाली पदों का भी ब्योरा लिया और इस संबंध में सरकार को पत्राचार करने की बात कही।
मुझे एक शिकायत मिली थी और उसके आधार पर मैं औचक निरीक्षण करने पहुंचा हूं। मेडिकल बोर्ड कक्ष शिफ्ट करना सरासर गलत है और मैंने डिप्टी सीएमओ को तुरंत प्रभाव से पुराने भवन के प्रथम तल पर मेडिकल बोर्ड बैठाने के आदेश दिए है। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि दिव्यांगों को मेडिकल सर्टिफिकेट की फाइल बाहर से 50 रुपये में खरीदनी पड़ रही है, जो गलत है।
राजकुमार मक्कड़, आयुक्त, हरियाणा दिव्यांगजन