चरखी दादरी। दादरी जिले में भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और इसके साथ ही पानी में फ्लोराइड व लवणीयता की मात्रा भी बढ़ चुकी है। हालात यह हैं कि जिले के बाढड़ा क्षेत्र को पहले डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। हालांकि 2018 में किसानों की मांग और हल्के सुधार के साथ डार्क जोन से बाहर कर दिया था। पेयजल संकट इतना गहरा गया है कि अब शहर ही नहीं, गांवों में भी लोग आरओ और कैंपर से पानी खरीद कर पीने के लिए मजबूर हैं। बाढड़ा क्षेत्र में भूजल स्तर करीब 260 फीट नीचे पहुंच चुका है। लगातार दोहन और प्राकृतिक जल स्रोतों के खत्म होने से हालात और गंभीर हो गए हैं। दादरी जिले के अधिकतर क्षेत्रों में भूजल लवणीय और सोडिक पाया जा रहा है, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। विशेषज्ञों के अनुसार फ्लोराइड युक्त पानी लंबे समय तक पीने से हड्डियों और दांतों से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
शहर का पानी लवणीय
शहर की बात करें तो स्थिति और भी चिंताजनक है। धरती का पानी पीने लायक नहीं रह गया है और विभाग की ओर से सप्लाई किया जाने वाला पानी भी कई क्षेत्रों में दूषित पहुंच रहा है। मजबूरी में लोग कैंपर और टैंकर पर निर्भर हो गए हैं। एक परिवार को महीने में हजारों रुपये सिर्फ पीने के पानी पर खर्च करने पड़ रहे हैं, जो आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है।
गांवों में भी लेना पड़ रहा कैंपर का सहारा
ग्रामीण इलाकों में भी हालात अलग नहीं हैं। पहले जहां गांवों में हैंडपंप और कुओं से पानी की जरूरत पूरी हो जाती थी, अब वहां भी आरओ कैंपर आम नजारा बन गया है। कई गांवों में खारा पानी आने के कारण पशुओं के लिए भी पानी की समस्या खड़ी हो गई है। इससे खेती और पशुपालन दोनों पर असर पड़ रहा है। कैंपर पहले जहां शहर तक ही सीमित थे, अब गांवों में भी लोग पीने के लिए पानी के लिए कैंपर रखवा रहे हैं।
बारिश से थोड़ा सुधार
पिछले साल मानसून में अच्छी बारिश हुई, जिससे भूजल स्तर में थोड़ी राहत जरूर मिली है। आंकड़ों के अनुसार इस मानसून सीजन में जिले में 506 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि 2024 मानसून सीजन में यह आंकड़ा 441 एमएम था। इसके चलते कुछ क्षेत्रों में जलस्तर करीब 5 फीट तक ऊपर आया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह राहत पर्याप्त नहीं है। यदि भूजल दोहन और जल संरक्षण पर गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो हालात फिर से बिगड़ सकते हैं।
दादरी शहर में पानी की स्थिति बेहद चिंताजनक है। धरती का पानी पूरी तरह पीने लायक नहीं रहा और सप्लाई का पानी भी कई जगह दूषित आ रहा है। लोग मजबूरी में कैंपर और टैंकर से पानी खरीद रहे हैं।
-महावीर फौजी, पूर्व प्रधान रविदास सभा।
हमारे इलाके में भूजल स्तर 230 फीट तक नीचे चला गया है और पानी खारा होने लगा है। पहले गांव में ही पीने का पानी मिल जाता था, अब हर घर को आरओ कैंपर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अच्छी बारिश के बाद भी स्थायी समाधान नहीं दिख रहा।
- अंकित आर्य, गांव बेरला निवासी।
जल संरक्षण ही मात्र उपाय : डॉ. यादव
पर्यावरणविद् व जनता कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. आर एन यादव ने कहा कि पृथ्वी की गर्भ में जो पानी है वो बारिश का पानी रिस-रिस के हजारों वर्षो में पहुंचा है। जिसका तेजी से दोहन हो रहा है। भूजल को बचाने का एकमात्र यही रास्ता है कि उसे ज्यादा से ज्यादा बचाया जाए और पानी को दोबारा से तालाबों या अन्य जरियों से भूगर्भ में पहुंचाया जाए।
जिले में जलस्तर नीचे जा रहा है, इस कारण अब भूजल पीने लायक कम होता जा रहा है। सरकार की ओर से 48 गांवों में जलकुंड बनाए गए हैं, इसके अलावा गांवों में जलस्तर का बोर्ड, वर्षामापी आदि लगाए हैं, ताकि लोगों में जागरूकता आए। बारिश ज्यादा होने के कारण थोड़ा सुधार हुआ है।
- खुर्शीद अहमद, जल विशेषज्ञ एवं आंकड़ा विश्लेषण अधिकारी।