चरखी दादरी। जिले के जलभराव वाले क्षेत्रों में बारिश के पानी की निकासी के प्रोजेक्ट पर अब जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है। सरकार की राज्य बाढ़ राहत कमेटी ने भी इस परियोजना को स्वीकृति दे दी है। स्वीकृति मिलने के बाद सिंचाई विभाग ने इस पर अगली प्रक्रिया शुरू कर दी है। 30 जून तक यह प्रोजेक्ट पूरा करने की योजना तैयार की जा रही है।
साढ़े 42 करोड़ की इस योजना के तहत जिले के कई गांवों में ओपन व अंडरग्राउंड पाइप लाइन बिछाई जाएंगी। कृषि क्षेत्र के जिन भागों में ज्यादा मात्रा में जलभराव होता है वहां वाटर टैंक बनाए जाएंगे। इससे करीब 20 गांवों के साढ़े तीन हजार किसानों को फायदा होगा।
दरअसल, जिले के काफी एरिया में हर साल बारिश से खेतों में जलभराव हो जाता है। खेतों में जलभराव होने पर किसानों की दो फसल खराब हो जाती हैं जिससे किसान को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बार-बार जलभराव होने से खत्म होने लगती है। जमीन में सेम की समस्या बढ़ जाती है जिससे फसली दाना ही नहीं अपितु खरपतवार व अन्य किस्म के पौधे भी नहीं उगते। लंबे तक ऐसी स्थिति बनी रहने पर जमीन बंजर हो जाती है।
ऐसी स्थिति दिल्ली रोड के कई गांवों में उत्पन्न होती है। गांव फतेहगढ़, मानकावास, चरखी, साहुवास, इमलोटा, सरूपगढ़, सांतौर, नीमली, कन्हेटी, भागवी, बिगोवा, मोरवाला, अचीना ताल क्षेत्र में जलभराव से हर साल ज्यादा नुकसान होता है। पानी की निकासी के प्रबंध नहीं होने से हर साल दिक्कत बनी रहती है। जिले के और भी कई गांव हैं जहां जलभराव की समस्या होती है। मानसून सीजन में हर साल साढ़े चार हजार एकड़ में जलभराव हो जाता है जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। लगातार दो माह तक खेतों में पानी भरा रहता है।
अब सरकार ने जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए विशेष योजना तैयार कर ली है। जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए राज्य बाढ़ राहत कमेटी ने प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी है। इसके तहत कई गांवों को कनेक्ट करते हुए अंडरग्राउंड व ओपन पाइप लाइनें बिछाई जाएंगी। जहां पर्याप्त जमीन की उपलब्धता नहीं होगी वहां अंडरग्राउंड पाइप लाइनें बिछाई जाएंगी। शेष क्षेत्र में ओपन लाइन से काम चलाया जाएगा। लाइनों के बीच में कुछ दूरी के अंतराल में होदी यानी छोटी टंकियां बनाई जाएंगी।
- रिजर्व और भंडारण टैंक का होगा निर्माण
नहरों के अंतिम छोर पर पानी से फसल खराब न हो इसके लिए रिजर्व टैंक बनाए जाएंगे। इतना ही नहीं अलग अलग स्थानों पर खेतों में भी भंडारण टैंक बनाए जाएंगे ताकि आसपास का भूमिगत जल रिचार्ज भी हो सके। कृषि क्षेत्र के जिन भागों में ज्यादा मात्रा में जलभराव होता है वहां ऐसे टैंक बनाए जाएंगे।
इस प्रोजेक्ट को जल्दी पूरा करवाने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। इस प्रोजेक्ट पर साढ़े 42 करोड़ रुपये का बजट किया जाएगा। 30 जून तक यह काम पूरा करने की योजना है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद खेतों में जलभराव की समस्या नहीं रहेगी। इस प्रोजेक्ट की सीएम की संस्तुति पर राज्य बाढ़ राहत कमेटी से भी मंजूरी मिल गई है।
-सतेंद्र सिंह, एक्सईएन, सिंचाई विभाग