चरखी दादरी। वर्ष 2024 में जिले के 31 गांवों में भू-जल का स्तर दो से ढाई फुट और नीचे गया जबकि पांच गांवों में बढ़ा है। ज्यादातर गांवों में भू-जल स्तर नीचे जाने के आंकड़े चिंताजनक हैं और समय रहते इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। इस साल गांव कांहड़ा में पौने तीन फुट तक जलस्तर घटा है। गांव बेरला में 1.2 फुट और उमरवास गांव में करीब 1.6 फुट तक जलस्तर नीचे गया है। इन गांवों में भूमिगत पानी पीने या सिंचाई करने योग्य नहीं है। वहीं, हंसावास, भांडवा, गोविंदपुरा, डांडमा और कारीरूपा दास गांव में भू-जल स्तर बढ़ा है।
पिछले वर्ष धनासरी गांव में भू-जल स्तर सबसे नीचे था। इस गांव में हर वर्ष औसतन तीन मीटर भू-जल स्तर गिर रहा है। ये सिलसिला पिछले करीब डेढ़ दशक से चल रहा है जो इस बार भी जारी रहा। जिले के 30 और गांवों में पिछले साल की तुलना में इस बार भूजल का स्तर और नीचे चला गया है। इन सभी 31 गांवों में भू-जल पीने और सिंचाई के योग्य नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस पानी में टीडीएस एवं फ्लोराइड की मात्रा तय मानकों से अधिक है।
अटल भूजल योजना के तहत भू-जल स्तर की लगातार निगरानी के लिए पीजोमीटर लगाए गए हैं। पिछले 20 साल के दौरान इन गांवों में नहरी पानी के अभाव में भू-जल का अत्यधिक दोहन हुआ है। इस कारण पिछले एक दशक में 70 प्रतिशत से अधिक बोरवेल और सार्वजनिक कुएं ठप हो चुके हैं।
कुल 47 गांवों को वर्ष 2017 में डार्क जोन शामिल किया गया था। इसके तहत यहां विभिन्न प्रकार की गतिविधियों जैसे बोरवेल करने और नलकूप लगाने पर रोक लगाई गई थी। बाद में सरकार ने वर्ष 2020 में बाढड़ा को डार्क जोन से बाहर कर दिया था। इसके बावजूद हर साल गांवों में भू-जल स्तर गिरता जा रहा है।
जलस्तर गिरने के ये रहे कारण
जोहड़ों और तालाबों का सूखना।
जल संरक्षण के लोगों को सजग न होना।
गांवों में 70 प्रतिशत कुएं व बोरवेल ठप होना।
मानसून सीजन में कई साल से बारिश कम होना
फिलहाल 15 गांवों में ही नहरी पानी की उपलब्धता होना।
नहरी पानी की कम उपलब्धता के कारण पानी का दोहन होना।
- विभाग कर रहा ये प्रयास
भू-जल विभाग की ओर से 47 में से 34 गांवों में सनबोर्ड, बिलबोर्ड, रेन गेज मीटर, जलस्तर संकेतक लगाए गए हैं ताकि लोगों को समय-समय पर जलस्तर का आंकड़ा मिलता रहे। गांव स्तर पर बोर्ड लगाकर जलस्तर का डाटा अंकित किया गया है। जलमापन के लिए पीजोमीटर लगाए गए है जिनसे ऑनलाइन रिपोर्ट मुख्यालय पहुंचती है। इसी प्रकार जल संभरण के लिए विभिन्न गांवों में बारिश के पानी की स्टोरेज के लिए सीमेंट की क्यारियां बनाई गईं हैं। वहीं, करीब 200 सरकारी भवनों की छतों से वर्षा जल संरक्षण किया जा रहा है।
बिजली संचालित नलकूपों से होती है बाढड़ा क्षेत्र में सिंचाई
बाढड़ा क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में किसान नलकूप से फसलों की सिंचाई करते हैं। बोरिंग से पानी का उठान के लिए एक की बजाय दो मोटर तक लगानी पड़ रही हैं तब जाकर सिंचाई हो पाती है। अब इन गांवों में जलस्तर का घटना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
किस गांव में कितना नीचे गया भू-जल स्तर मीटर में
गांव वर्ष 2023 2024
धनासरी 95.18 95.49
हंसावास कलां 85.75 85.52
किष्किंधा 71.58 71.90
भांडवा 73.92 74.29
द्वारका 64.78 64.90
गोविंदपुर 68.71 69.42
लाड 79.28 79.78
आर्यनगर 67.12 67.67
डांडमा 75.66 75.60
खोरड़ा 71.95 72.14
श्याम कलां 54.38 54.95
सिरसली 75.18 75.64
कारीरुपा दास 75.05 73.39
कारीतोखा 69.16 69.84
हड़ोदी 70.70 70.86
डोहका मौजी 58.11 58.26
डोहका हरिया 41.19 41.39
गोपी 71.83 72.06
नीमड़ बडेसरा 69.28 69.47
लाडावास 61.05 61.08
मांढ़ी केहर 67.46 67.63
रामपुरा 48.91 49.21
चांदवास 71.92 71.94
डोहका दीना 62.85 62.86
डूडीवाला किशनपुरा 58.64 59.40
डालावास 69.54 69.20
जीतपुरा 62.44 62.84
काकड़ोली हुक्मी 69.34 69.74
काकड़ोली सरदारा 67.33 67.58
कारी धारणी 71.35 71.67
मांढी पिरानु 52.52 52.78
विभाग की ओर से जलसंरक्षण एवं संवर्धन के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। करीब पांच गांवों में भू-जल स्तर बढ़ा है जबकि 31 में नीचे गया है। आम लोगों को भी चाहिए कि वे विभाग के प्रयासों के साथ इस दिशा में काम करें ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए जल बचाया जा सके।
- खुर्शीद अहमद, भू-जल विशेषज्ञ।