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सरकार कर रही बढ़ाने के प्रयास, जिले में घटा मछली और सूअर पालन के प्रति रुझान

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चरखी दादरी। स्वरोजगार के तहत अब मछली व सूअर पालन के प्रति खासकर युवाओं का रुझान कम हुआ है। 2012 की गणना के तहत जिला में मछलियों की औसत संख्या 13740 थी, जबकि नौ साल बाद 2021 की गणना में बढ़ने की बजाय यह घटकर 12946 पर आ गई है। इसी प्रकार 2012 में सूअरों की संख्या 2153 थी जो अब 2021 की गणना में घटकर 1737 रह गई है। जिला में तालाबों के विलुप्त होने व पानी के संसाधनों की कमी से मछली पालन का व्यवसाय अब घाटे का सौदा बनता जा रहा है जबकि सरकार की ओर से मछली व सूअर पालन को बढ़ावा दिए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी प्रकार सुअर पालन व्यवसाय से भी रुझान कम हुआ है।
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सरकार कौशल विकास प्रशिक्षण पर ज्यादा बल दे रही है, ताकि लोग रोजगार लेने के बजाय देने वाले बनें। जबकि श्रम एवं रोजगार विशेषज्ञों का मानना है कि आज का बाजार प्रतिस्पर्धात्मक हो गया है। हर काम-धंधा में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। जैसे-तैसे लागत खर्च बढ़ाकर उत्पादन बढ़ा दिया जाता है, लेकिन तैयार माल की ब्रिकी के लिए प्लेटफार्म नहीं मिल पाता। माल की बिक्री का रास्ता व्यवसायियों को दिखाई नहीं देता। चाहे मछली पालन, सूअर व मुर्गा पालन व्यवसाय हो। प्राकृतिक आपदाएं भी इन व्यवसायों में बाधा बन रही हैं। कई बार तो मोटी आर्थिक चपत लग जाती है। बीमारी आदि के कारण भी मोटा नुकसान झेलना पड़ता है।
आजकल पशुओं में नित नए रोगों को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन पशु उपचार का दायरा न बढ़ने की वजह से पशुपालकों को समय-समय पर काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। सुअर, मछली भी प्राकृतिक बीमार व आपदा का शिकार होते रहे हैं, जिससे व्यवसायी को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
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संसाधनों में सुधार की जरूरत -
इन व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों में बढ़ोतरी करने की जरूरत है। गांवों में तालाबों का जीर्णोद्धार कर मछली पालन को बढ़ावा दिया जा सकता है। समुचित मात्रा में पानी का प्रबंध भी करने की जरूरत है। आज लोगों को पर्याप्त मात्रा में पेयजल ही उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसी प्रकार सूअर बाजारों में घूमते रहते हैं। उनके रख-रखाव व चारा आदि के अलावा उचित जगह का प्रबंध होना चाहिए। बड़े स्तर मछली पालन के लिए सरकार की ओर से आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिएं। बीमारियों के इलाज के लिए विशेष चिकित्सकों की टीमें बनाई जानी चाहिए, ताकि महामारी आने पर समय रहते नियंत्रण किया जा सके और व्यवसायी को घाटा न झेलना पड़े।
मछली कारोबार बढ़ता है तो इनकी संख्या बढ़ना स्वाभाविक है। प्रोडक्ट की संख्या बढ़ने पर ही लाभ के संकेत मिलते हैं। इसके लिए सभी सरकारी विभाग सामूहिक जिम्मेदारी निभाएं। प्रोडक्ट बढ़ाने पर फोकस करना जरुरी है, तभी मुनाफा मिल पाएगा।
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- डॉ. एमके जैन, उद्यमिता एवं वाणिज्य विशेषज्ञ।
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