चरखी दादरी। कोरोना महामारी के दौरान माता-पिता दोनों को खोने वाले दस अनाथ बच्चों के सिर पर अब ‘सरकार’ का हाथ होगा। इन बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 18 वर्ष की उम्र तक शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के तहत 18 वर्ष तक 2500 रुपये प्रति बच्चे प्रति माह खर्च किए जाएंगे। , निजी स्कूल में दाखिले के लिए पीएम केयर्स से आरटीई के तहत फीस, वर्दी, पाठयक्रमों व नोटबुक की सुविधा प्रदान की जाएगी।
बुधवार को उपायुक्त अमरजीत सिंह मान ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के क्रियान्वयन को लेकर गठित कमेटी ने समीक्षा की। कमेटी में नगराधीश अमित मान, जिलाशिक्षा अधिकारी जयप्रकाश सभ्रवाल, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष शिल्पी मडिया, परियोजनाअधिकारी गीता सहारण और जिला बाल संरक्षण अधिकारी नीलकमल शामिल हैं। बैठक में योजना के तहत चिन्ह्ति किए गए बच्चों को तुरंत योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया।
जिले में ऐसे कुल 10 बच्चे पाए गए हैं, जिनके माता पिता की कोरोना की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई है। योजना के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगा। 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए नजदीकी केंद्रीय विद्यालय/निजी स्कूल में डे-स्कालर के रुप में दाखिला और निजी स्कूल में दाखिला के लिए पीएम केयर्स से आरटीई के तहत फीस, वर्दी, पाठ्यक्रमों व नोटबुक की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार 11 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा के दौरान किसी भी आवासीय विद्यालय जैसे सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय आदि में दाखिला, निजी स्कूल में दाखिले के लिए पीएम केयर्स से आरटीई के तहत फीस, वर्दी, पाठ्यक्रमों व नोटबुक की सुविधा प्रदान कीजाएगी। इसके अलावा दादा-दादी या विस्तारित परिवार की देखरेख में रहने वाले बच्चे को निकटतम केंद्रीय विद्यालय/निजी स्कूल में डे-स्कालर के रुप में दाखिला दिया जाएगा।