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Charkhi Dadri News: छोटी उम्र, बड़े अरमान, कुश्ती में बसी स्नेहा की जान

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सोनीपत में मैच के बाद अपने कोच रिंकू बूरा और जिले की टीम की इंचार्ज कृष्णा धवन के साथ खिलाड़ी स
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माई सिटी रिपोर्टर
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चरखी दादरी। गांव नया अटेला स्थित बाबा मंडालिया अखाड़ा में कुश्ती का अभ्यास कर रही 12 वर्षीय पहलवान स्नेहा की जान कुश्ती में बसी है। स्नेहा का सपना है कि वह देश के लिए ओलंपिक में पदक जीते। इसी सपने को पूरा करने के लिए वह रोजाना 4 से 5 घंटे तक कड़ा अभ्यास करती है।
एनआईएस कोच रिंकू बूरा ने बताया कि पिता परमिंदर खुद भी कुश्ती खिलाड़ी रह चुके हैं और माता गृहिणी हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी स्नेहा ने 4 साल पहले कुश्ती का अभ्यास शुरू किया था। उसके बाद से वह अंडर-11 और 14 में भाग ले चुकी हैं। स्नेहा ने स्कूली गेम्स में वर्ष 2023 में अंडर-11 में भाग लेते हुए पहली बार द्वितीय स्थान पर रहते हुए रजत पदक जीता था।
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कोच के अनुसार, उसके बाद स्नेहा ने कुश्ती में और अभ्यास किया। 2024 में अंडर-11 स्कूली गेम्स में भाग लेते हुए चांदी के पदक को सोने में बदला। इस वर्ष सोनीपत के खरखौदा में हुई स्कूली गेम्स में अंडर-14 में भाग लेते हुए कांस्य पदक जीता है।
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स्नेहा का कहना है कि जिस तरह सुशील कुमार, बजरंग पूनिया, योगेश्वर दत्त, साक्षी मलिक, बबीता फोगाट, विनेश फोगाट ने कुश्ती में देश के लिए पदक जीते हैं, वह भी वैसे ही जीतना चाहती है।
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