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Charkhi Dadri News: एजेंसी से कचरा उठान का अनुबंध छह माह से खत्म, व्यवस्था बनाने में ग्राम पंचायतों से लेंगे सहयोग

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सूखा व गीला कचरे के लिए बनी शेड। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। स्वच्छता मिशन 2.0 के तहत वेस्ट प्लास्टिक का निपटान करने के लिए वेंडर का अनुबंध खत्म हो चुका है। नया अनुबंध होने तक विभाग की ओर से कचरा निस्तारण में ग्राम पंचायतों की मदद ली जाएगी। इस योजना के तहत डोर-टू-डोर कचरे का उठान किया जाता है और विभाग ने ग्राम पंचायतों को इस व्यवस्था को कायम रखने में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।
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बता दें कि अनुबंध अनुसार वेंडर प्रशासन से आठ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से कचरे की खरीद करता था। बाद में वेंडर इस कचरे को पीडब्ल्यूडी ब्रांच की तकनीकी शाखा को हैंडओवर करता था। इससे पहले कचरे को इकट्ठा करने के लिए गांवों में हॉलनुमा शेड बनाई गई हैं। एजेंसी से अनुबंध पूरा हुए छह माह का समय बीत चुका है और अब दोबारा से अनुबंध सरकार की ओर से किया जाना है। तब तक कचरा उठान सेवा को जारी रखना एडीसी कार्यालय की स्वच्छता मिशन शाखा के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अगर जल्द ही अनुबंध नहीं किया गया तो व्यवस्था डगमगाने के भी आसार हैं।
ओडीएफ फेज दो के तहत विभाग घुलनशील और अघुलनशील कचरे का प्रबंध कर रहा है। ठोस व तरल कचरे के लिए अलग व्यवस्था की जाती है। इसके तहत गांवों में 36 गुना 25 वर्गगज की शेड बना रखी हैं। इस शेड के समीप कंपोस्ट पिट लगा रखे हैं। इसमें दो अलग-अलग भाग बनाए गए हैं जिनमें ठोस व तरल कचरा रखा जाता है। इसके तहत कांच की बोतल, प्लास्टिक व अन्य प्रकार के कचरे को अलग-अलग करके रखा जाएगा। अनुबंध समाप्त होने पर विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों से कचरा निस्तारण की व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है।
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- प्रतिदिन निकलता है तीन हजार किलोग्राम कचरा
पिछले साल सरकार ने इस कार्य के लिए वेंडर को वर्क अलॉट किया था। इसके प्लान के तहत प्रतिदिन करीब तीन हजार किलोग्राम कचरे का उठान गांवों से किया गया। कचरा संग्रहण के लिए गांवों में एक जगह निश्चित की गई है ताकि नियमित रूप से उठान होता रहे। पंचायतों की मदद के लिए विभाग ने सर्कुलर भी जारी कर दिया है।
- जीरो टैग से अटैच हैं शौचालय
स्वच्छता मिशन के तहत गांवों व शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर शौचालयों का निर्माण कर इनको जीरो टैग से अटैच कर रखा है ताकि इनकी लोकेशन व वर्किंग की स्थिति का पता चलता रहे। जिला में इस मुहिम के तहत करीब चार हजार शौचालयों का निर्माण दो साल पहले हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे का निपटान विकट समस्या रही है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने की भी और जरूरत है।
- नया अनुबंध होने तक प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा काम
नया अनुबंध नहीं होने तक ग्राम पंचायतों की मदद ली जाएगी। कचरे प्रबंधन का कार्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। सरकार हर स्तर पर कचरा प्रबंधन के प्रयासों में जुटी है ताकि शहर की तर्ज पर गांवों को भी साफ-सुथरा बनाया जा सके। इस प्लान के तहत प्रत्येक गांव में कचरे का निपटान किया जाता है। लोगों को चाहिए कि वे इस अभियान में सहयोग करें ताकि स्वच्छता मिशन को सिरे चढ़ाया जाएगा।
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-अनुषमा, असिस्टेंट डिस्ट्रिक को-ऑर्डिनेटर, स्वच्छता मिशन
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