आजादी के मतवाले
फोटो 15
स्वतंत्रता सेनानी भूरू सिंह।
फोटो 16
स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान के लिए भूरू सिंह को मिला ताम्रपत्र। स्रोत : परिजन
- आजादी की लड़ाई में ढाणी फोगाट निवासी स्वतंत्रता सेनानी भूरू सिंह का रहा अहम योगदान, अंग्रेजी हुकूमत की यातनाएं देने पर भी हार नहीं मानी
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। स्वतंत्रता सेनानी भूरू सिंह से अंग्रेज पत्थर तुड़वाते थे। उनको खाने के लिए सूखी एवं ज्यादा मात्रा में नमक की रोटी दी जाती थी। अंग्रेजी सेना की यातनाएं झेलते हुए उन्होंने साहस नहीं छोड़ा। वह पीछे नहीं हटे और अंग्रेजी हुकूमत को परास्त कर दम लिए।
भूरू सिंह का जन्म गांव ढाणी फोगाट में 1910 में खजानी देवी व डीघराम के परिवार में हुआ थे। उनके दो भाई और दो बहनें थीं। उनके पिता किसान थे। 23 दिसंबर 1927 को भूरू सिंह बरेली में जाट रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। सेना में रहते हुए उन्होंने तीन कक्षा तक पढ़ाई भी की। उन्होंने आरटी कोर्स भी किया। इस दौरान उन्होंने कई मेडल भी जीते।
भुरू सिंह के पौत्र अमृतपाल ने बताया कि उनके दादा 1939-45 में सामान्य सेवा पदक, डिफेंस व युद्ध मेडल जीते। तत्पश्चात नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आह्वान पर वह आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। उन्होंने मलेशिया, कोहिमा, सिंगापुर व वर्मा में नेताजी के साथ अंग्रेजी सेना को खूब छकाया।
इस दौरान भूरू सिंह को गिरफ्तार कर सिंगापुर जेल में डाल दिया गया। जेल में कई साल बीत गए। कोई सूचना नहीं मिलने पर परिजनों ने उन्हें मृत समझ लिया था। जेल से रिहा होने के बाद वह घर लौटे। उनका विवाह लाडो देवी के साथ हुआ। उनके तीन पुत्र व तीन पुत्रियां हुईं। भूरू सिंह के पौत्र व बेटे ने भी भारतीय सेना में देश की रक्षा की।
- 21 अक्तूबर 1997 को मिला ताम्रपत्र
21 अक्तूबर 1997 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वतंत्रता सेनानी भूरू सिंह को ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। हरियाणा सरकार की ओर से भी उनको विशेष सम्मान दिया गया। 100 वर्ष की आयु में 15 जनवरी 2010 को उनका निधन हो गया।