चरखी दादरी। दादरी डिपो में छह माह के दौरान पांच बसें कंडम हो चुकी हैं जबकि चार बसें अब नवंबर तक कंडम हो जाएंगी। इससे डिपो के बेड़े में बसों की संख्या कम हो जाएगी, जिसका सीधे तौर पर असर परिवहन सेवाओं पर पड़ेगा। दूसरी ओर अभी तक डिपो को एक भी नई बस नहीं मिली है।
बता दें कि दादरी डिपो में फिलहाल 125 बसें हैं। इनमें से पांच बसें चालक प्रशिक्षण केंद्र को दी गई हैं और इनका उपयोग केवल चालक प्रशिक्षण में ही किया जाता है। इनके अलावा 15 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चलती हैं जबकि डिपो के बेड़े में फिलहाल 105 रोडवेज बसें हैं जो विभिन्न रूटों पर चल रही हैं।
105 में से अक्तूबर में दो और बसें कंडम घोषित की जाएंगी और इसके बाद नवंबर में भी दो बसें कंडम घोषित कर दी जाएंगी। चार और बसें कंडम होने के डिपो के बेड़े में 101 बसें ही रह जाएंगी। इससे पहले अप्रैल से सितंबर तक पांच बसें कंडम हो चुकी हैं। इनमें से अप्रैल में तीन और जुलाई में 2 बसें कंडम घोषित हुई थी।
बाढड़ा व झोझूकलां बस स्टैंड में खड़ी कीं कंडम बसें
डिपो अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उनके पास हर रूट के लिए पर्याप्त बसें हैं। ऐसा कोई रूट नहीं है जहां पर डिपो की ओर से बस सुविधा नहीं दी गई हो। डिपो की ओर से यात्रियों की संख्या व मांग के अनुसार सभी रूटों पर बसों का संचालन किया जा रहा है। फिलहाल कंडम बसों को झोझूकलां व बाढड़ा बस स्टैंड में रखा गया है। विभाग की ओर से अब इन कंडम बसों की नीलामी की जाएगी।
रूटों की सेवाओं पर पड़ेगा असर
अब दो माह में चार बसें के हटने से कुछ रूट प्रभावित होंगे। नई बसें मिलने तक डिपो की ओर से जिस रूट पर अधिक बसें चल रही हैं उन रूटों पर चलने वाली बसों से यहां व्यवस्था करनी होगी। इस प्रक्रिया में अन्य रूटों की सेवाओं में कटौती होना स्वभाविक है। वहीं, बसों की कमी होने पर यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ेगी।
कंडम बसें लोकल रूटों से हटेंगी और इनके जाने से कोई भी रूट प्रभावित नहीं होगा। डिपो की ओर से उन रूटों पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल बसों की डिमांड मुख्यालय भेजी हुई है।
नवीन शर्मा, जीएम, चरखी दादरी रोडवेज डिपो