चरखी दादरी। किसानों और आमजन की सुविधा के लिए सिंचाई विभाग जिला की मेन लोहारू कैनाल पर पांच नए पुलों का निर्माण करवाएगा। इसके लिए टेंडर आमंत्रित कर दिया गया है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर धरातल पर काम शुरू करवा दिया जाएगा। जिन पुलों का निर्माण होगा वो करीब 45 साल पुराने हैं। खास बात यह है कि मानसून सीजन से पहले सभी पांचों पुलों का निर्माण करवा दिया जाएगा।
जिला में नहरों पर बने पुल वर्षों पुराने होने से कंडम स्थिति में हैं। सिंचाई विभाग ने 2020-21 के दौरान करीब 10 नए पुल भी बनाए हैं लेकिन पुराने पुल हादसों का कारण भी बन रहे हैं। कई भागों में पुल की साइड वाल टूटी हुई हैं तो कही पुल का लेंटर जवाब दे चुका है। यातायात की दृष्टि से ये पुल सुरक्षित नहीं माने जा रहे हैं। किसान फसल कटाई के समय ट्रैक्टर से अनाज आदि लेकर इन पुलों के जरिये ही गुजरते हैं। इसी प्रकार अन्य भारी वाहनों का भी आवागमन बना रहता है।
विभाग समय-समय पर पुलों की सर्वे करवाता आ रहा है ताकि कंडम पुल का नए सिरे से निर्माण करवाया जा सके। अब पांच और नए पुलों के निर्माण के लिए टेंडर लगा दिए गए है। यह सभी पुल मेन लोहारू कैनाल पर बनाए जाने हैं। नए पुल गांव खातीवास, मोरवाला, अचीना में बनने हैं और इसके अलावा दो और पुल इसी नहर पर बनने प्रस्तावित हैं। अब जल्द ही इनके निर्माण का कार्य शुरू हो सकेगा।
- जिले में हैं कुल 75 नहरें
जिले में मेन लोहारू नहर, लोहारू कैनाल के अलावा बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी, कितलाना डिस्ट्रीब्यूटरी, मैहड़ा डिस्ट्रीब्यूटरी, बौंदकलां डिस्ट्रीब्यूटरी सहित करीब 75 नहरें हैं। प्रत्येक नहर पर पुल की जरूरत होती है ताकि आवागमन में परेशानी न होने पाए। किसानों को भी खेतों में आने-जाने के लिए पुल की जरूरत होती है। माइनरों पर छोटी पुलिया बनाई जाती हैं।
- इन पुलों का करवाया जा चुका निर्माण
2021 वर्ष में भिवानी रोड पर नहर का नया पुल बनाया गया था। इसी प्रकार सिंचाई विभाग मेन लोहारू नहर पर बड़ा पुल भी बना चुका है। विभाग ने यह पुल आरडी-86 पर गांव रावलधी में पहले से बने पुल के पीछे बनाया है। रावलधी पुल मेन रोहतक रोड पर बना हुआ है यहां से प्रतिदिन करीब 10 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं।
जल्द ही इन पुलों का निर्माण कार्य शुरू होगा। इसके लिए टेंडर आमंत्रित कर दिया है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर वर्क ऑर्डर जारी किए जाएंगे। मानसून सीजन से पहले यह काम पूरा होने की पूरी उम्मीद है।
-सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग