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Charkhi Dadri News: मानसून की बेरुखी से सूख रहे खेत 12 घंटे तीन फेज बिजली की मांग

Sat, 22 Aug 2026 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
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चरखी दादरी। जिले में मानसून की बेरुखी और लगातार बारिश न होने से खरीफ फसलों पर सिंचाई संकट गहराने लगा है। खेतों से तेजी से नमी खत्म होने के कारण किसानों को बाजरा, ग्वार और कपास की फसलों को बचाने के लिए बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है।
ऐसे में किसान संगठनों ने बिजली नलकूपों के लिए थ्री-फेज बिजली आपूर्ति बढ़ाने की मांग उठाई है। किसानों का कहना है कि फिलहाल नलकूपों को करीब आठ घंटे बिजली मिल रही है जबकि मौजूदा हालात में कम से कम 12 घंटे बिजली आपूर्ति की जरूरत है।
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जिले के रेतीले क्षेत्रों में बारिश न होने का असर अन्य इलाकों की अपेक्षा अधिक दिखाई दे रहा है। रेतीली जमीन में नमी लंबे समय तक नहीं टिकती और तेज धूप के कारण खेतों की ऊपरी परत जल्द सूख जाती है। इससे फसलों की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। किसानों का कहना है कि खरीफ की प्रमुख फसलें अब महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच चुकी हैं। ऐसे समय में पर्याप्त नमी नहीं मिलने पर बाजरा में दाना कमजोर रह सकता है जबकि ग्वार और कपास की पैदावार पर भी प्रतिकूल असर पड़ने का अंदेशा है।

हर तीसरे दिन करनी पड़ रही सिंचाई
किसानों के अनुसार बिजली नलकूपों से सिंचाई के लिए थ्री-फेज बिजली आवश्यक है। सीमित समय तक बिजली मिलने के कारण किसान फव्वारा सेट के माध्यम से पर्याप्त सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। कई किसानों को हर तीसरे दिन खेतों में पानी देना पड़ रहा है लेकिन बिजली आपूर्ति का समय कम होने से उन्हें सिंचाई का काम पूरा करने में परेशानी हो रही है। बिजली रात के समय मिलने पर भी किसान खेतों में पहुंचकर फसलों की सिंचाई करने को मजबूर हैं।
300 फीट से पानी खींच रही मोटरें
रेतीले क्षेत्र में भूजल स्तर करीब 300 फीट तक नीचे होने के कारण सिंचाई पहले से ही महंगी साबित हो रही है। गहरे पानी से पानी खींचने के लिए अधिक बिजली की जरूरत पड़ती है। पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने पर किसानों को कई बार वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है जिससे उनकी लागत बढ़ रही है।

बार-बार सिंचाई से बढ़ रही प्रति एकड़ लागत
बारिश न होने से किसानों की प्रति एकड़ लागत में भी लगातार इजाफा हो रहा है। फव्वारा सेट और नलकूपों को बार-बार चलाने से बिजली, डीजल, मजदूरी और अन्य कृषि खर्च बढ़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो सिंचाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ा सकता है। वहीं पर्याप्त पानी नहीं मिलने की स्थिति में उत्पादन कम होने का खतरा भी बना हुआ है।

जिले में करीब पांच हजार बिजली नलकूप कनेक्शन
जिले में करीब पांच हजार बिजली ट्यूबवेल कनेक्शन हैं। इन नलकूपों के माध्यम से बड़ी संख्या में किसान खरीफ फसलों की सिंचाई करते हैं। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो सिंचाई की मांग और बढ़ जाएगी। ऐसे में बिजली आपूर्ति का समय अभी से बढ़ाना जरूरी है ताकि बाजरा, ग्वार और कपास जैसी फसलों को सूखने से बचाया जा सके और किसानों को उत्पादन नुकसान से राहत मिल सके।

कोट:
सरकार को कम से कम 12 घंटे तीन फेज की बिजली देनी चाहिए। बिजली की कमी के चलते सभी फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। किसानी वैसे ही घाटे का सौदा बनती जा रही है।- हरपाल सिंह भांडवा, जिला अध्यक्ष, भाकियू।
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वर्सन:
किसानों को पर्याप्त मात्रा मेंं बिजली दी जा रही है। पानी की कमी नहीं रहने दी जाएगी। सरकार किसान के कल्याण के लिए कृत संकल्प है। - राम सिंह, एसडीओ, बिजली निगम।
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