चरखी दादरी। इस बार मानसून में पर्याप्त बारिश न होने से रबी की फसलों की बिजाई किसानों के लिए कठिन और खर्चीला काम हो गया है। सिंचाई के बिना बिजाई संभव नहीं होगी जिससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ जाएगा। जिले के किसानों पर फसल लागत के रूप में करीब चार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। मानसून सीजन 17 सितंबर को समाप्त हो चुका है।
जिला में इस बार मानसून की बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। मानसून सीजन के 100 दिनों में कुल 316 एमएम बारिश हुई जो सामान्य 450 एमएम से काफी कम है। वर्ष 2016 में सर्वाधिक 576 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। जून के दूसरे सप्ताह से बारिश का सिलसिला शुरू हुआ था।
तब लग रहा था कि इस बार मानसून अच्छा रहेगा। किसानों ने जून में बाजरा, ग्वार, ज्वार और मूंग जैसी फसलों की अगेती बिजाई की थी। जुलाई, अगस्त और सितंबर माह में भी रुक-रुककर बारिश होती रही। हालांकि, सितंबर में कम बारिश के कारण बाजरे के दाने की गुणवत्ता गिर गई। जिले का कुल कृषि योग्य क्षेत्र दो लाख 73 हजार एकड़ है।
फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव
कम बारिश के कारण कई क्षेत्रों में फसलों को नुकसान हुआ है। लगातार उमस और धूप बने रहने से खासकर कपास की फसल में कीट और रोगों से क्षति हुई। बाजरा की फसल पर भी बारिश की कमी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। किसानों साहिल, टेकराम और कलेराम का कहना है कि इस बार मानसून ने दगा दे दिया। खेतों में नमी सूखने से सरसों की बिजाई के लिए पहले सिंचाई करनी पड़ेगी जिससे लागत बढ़ जाएगी।
सिंचाई लागत और जलस्तर पर असर
एक अनुमान के मुताबिक, रबी फसलों की बिजाई के लिए सिंचाई पर बिजली और डीजल का खर्च करीब चार करोड़ रुपये होगा। यह किसानों पर सीधा अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा। खेतों में नमी सूख जाने के कारण सरसों की बिजाई के लिए भी पहले सिंचाई करनी पड़ेगी। इससे प्रति एकड़ लागत खर्च में वृद्धि होगी। बरानी क्षेत्र में रबी की फसलों की बिजाई का कार्य और भी कठिन हो गया है। अच्छी बारिश न होने के कारण भूमिगत जलस्तर भी नीचे गिरा है, जिससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित होगी।
पिछले वर्षों की बारिश की स्थिति
पिछले सालों की बारिश के आंकड़े बताते हैं कि 2014 में 207 एमएम, 2015 में 309 एमएम, 2016 में 576 एमएम, 2017 में 315 एमएम, 2018 में 183 एमएम, 2020 में 289 एमएम, 2021 में 512 एमएम, 2022 में 347 एमएम और 2023 में 350 एमएम बारिश हुई थी। भविष्य के अनुमानों में 2024 में 400 एमएम, 2025 में 514 एमएम और 2026 में 316 एमएम बारिश दर्ज की गई है।
8 के बजाय 10 घंटे दी जाए बिजली
मानसून की पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होने से खासकर रेतीले क्षेत्र में रबी की फसलों की बिजाई करना इस बार आसान काम नहीं है। सिंचाई करके ही बिजाई की जा सकेगी जिससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ जाएगा। सरकार को बिजली नलकूपों के लिए आठ के बजाय 10 घंटे बिजली देनी चाहिए।
-हरपाल सिंह भांडवा, अध्यक्ष भाकियू
बढ़ जाएगी लागत : एसडीओ
इस बार मानसून की बारिश सामान्य से कम हुई है इससे किसानों को रबी की फसलों की बिजाई करने में परेशानी होगी। किसान पर लागत खर्च और बढ़ जाएगा। इस बार मानसून सीजन फीका रहा।
-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग