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Charkhi Dadri News: औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जौ की श्रेष्ठ किस्म बीएच-885 की बिजाई करें किसान

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जौ की ढेरी
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चरखी दादरी। किसान औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जौ की श्रेष्ठ किस्म बीएच-885 की बिजाई करें। इसका दाना मोटा व तना मजबूत होता है जिससे किसान को उत्तम भाव मिलता है। इस जौ की खपत औद्योगिक क्षेत्र में होती है और वहां आयुर्वेदिक दवाओं में इसका इस्तेमाल होता है।
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कई बार मांग होने पर विदेशों में इस किस्म का निर्यात किया जाता है। किसान जौ की अन्य प्रकार की किस्मों की बिजाई अब कर सकते हैं। बिजाई से पहले खेत समतल हो और हेरो व कल्टीवेटर से तीन से चार जुताई अवश्य करें।
बता दें कि रबी सीजन में जौ की फसल प्रमुख मानी जाती है। जौ का भाव आमतौर पर गेहूं के समकक्ष ही बना रहता है। इस समय तो बाजार में जौ का भाव गेहूं से ज्यादा बना हुआ है। जौ को बरानी व सिंचित दोनों क्षेत्रों में बोया जा सकता है। इस बार तो मानसून की बारिश भी खासी हुई है ऐसे में किसान बरानी एरिया में जौ की बिजाई आसानी से कर सकते हैं। जौ की फसल में ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। एक या दो सिंचाई में ही यह फसल पककर तैयार हो जाती है।
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इन किस्मों का करें चयन
जौ की सबसे उत्तम किस्म बीएच-885 है जिसकी औद्योगिक क्षेत्र में ज्यादा मांग होती है। इस किस्म की औसत पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ है। अगर किसान समय पर सही देखरेख करें तो पैदावार और भी बढ़ सकती है। इसकी बिजाई का समय नवंबर प्रथम सप्ताह से से 20 नवंबर तक है। इसी प्रकार जौ की एक अन्य प्रमुख किस्म बीएच- 146 है। इसकी औसत पैदावार 21 क्विंटल तक है। यह पीला रतवा रोग रोधी है। जौ की एक अन्य किस्म बीएच-75 है। इस किस्म में पौधे में ज्यादा फुटाव होता है। इसकी औसत पैदावार प्रति एकड़ 16 क्विंटल तक है। इसी प्रकार जौ की एक किस्म बीएच-393 है और इसकी औसत पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ तक है। जौ की एक और किस्म बीएच-902 है जिसकी औसत पैदावार 20 क्विंटल तक मिल सकती है।
30 से 35 किलोग्राम होनी चाहिए बीज की मात्रा
इन सभी प्रकार की किस्मों के लिए बीज की मात्रा 30 से 35 किलोग्राम प्रति एकड़ होनी चाहिए। बरानी एरिया में बीज की मात्रा 30 किलोग्राम प्रति एकड़ होनी चाहिए। पछेती किस्मों में बीज की मात्रा 20 प्रतिशत तक बढ़ा देनी चाहिए। इन सभी प्रकार की किस्मों में एक या दो सिंचाई में दाना पक कर तैयार हो जाता है।


किसान जौ की बिजाई के लिए खेत को अच्छे से तैयार करें। बरानी व सिंचित दोनों क्षेत्रों में बिजाई की जा सकती है। रेतीला एरिया में जौ की बढिय़ा पैदावार ली जा सकती है। इस समय जौ की बिजाई की जा सकती है।
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- डॉ. जितेंद्र सिहाग, खंड कृषि अधिकारी, कृषि विभाग
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