बाढड़ा क्षेत्र में ओलावृष्टि से प्रभावित फसलें। फाइल फोटो
- दिसंबर 2024 एक और मार्च 2025 में 3 बार ओलावृष्टि होने से 35 गांवों की 41 हजार एकड़ में खड़ीं फसलों को पहुंचा था नुकसान, मुख्यालय रिपोर्ट भेजने के बाद भी अब तक जारी नहीं हुई मुआवजा राशि
- अधिकारियों के साथ दो दौर की वार्ता करने के अलावा मुख्यमंत्री से भी मिल चुके किसान संगठन
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। 28 दिसंबर 2024 के अलावा एक, 13 व 14 मार्च 2025 को हुई ओलावृष्टि का मुआवजा किसानों को अब तक नहीं मिला है। किसान 7 माह से मुआवजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अब तक उन्हें फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
किसान ओलावृष्टि और पहले का लंबित मुआवजा दिलाने के लिए दादरी आगमन पर सीएम नायब सिंह सैनी से मिले थे। उन्होंने चंडीगढ़ में अधिकारियों की मुआवजा संबंधी बैठक लेकर समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया था। वहीं, किसान संगठनों की विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दो दौर की वार्ता हो चुकी है। इनमें अधिकारियों का तर्क रहा कि विभाग की ओर से खराबे की रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है।
28 दिसंबर को हुई ओलावृष्टि से 25 हजार एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ था। इसमें 35 गांवों में 13 हजार एकड़ में कहीं 25 प्रतिशत तक तो कहीं 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान दर्शाया गया था।
- मार्च में 12 हजार एकड़ क्षेत्र पर पड़ी थी ओलों की मार
एक मार्च को हुई ओलावृष्टि से 12 हजार एकड़ क्षेत्र ओलों की मार से प्रभावित हुआ था। 13 व 14 मार्च को जिले के गांवों में ओले गिरने से सरसों व गेहूं की फसल को नुकसान हुआ था। सर्वे के आधार पर विभाग को कुल 16 हजार एकड़ क्षेत्र ओलावृष्टि से प्रभावित मिला था। इसमें सरसों का रकबा 9 हजार व गेहूं का 7 हजार एकड़ रहा। उस समय कृषि विभाग की 20 अधिकारियों व कर्मचारियों की टीमों ने दो दिन में नुकसान की रिपोर्ट तैयार की थी।
- इन गांवों में हुआ था नुकसान
कृषि विभाग की रिपोर्ट में जिन गांवों में नुकसान हुआ था, उनमें मोड़ी, मकड़ाना, रामनगर, कपूरी, मंदोला, घसोला, दूधवा, आदमपुर, गोठड़ा, संतोखपुरा, ढाणी फोगाट, लांबा, कोहलावास, झींझर, बौंदकलां,रानीला, अचीना, भागेश्वरी, कादमा, गुडाना, अचीना, चांगरोड, भांडवा, हंसावास कलां, नीमड़-बडेसरा, ऊण, कांहड़ा व बेरला आदि 35 गांव शामिल हैं।
- जिले में हैं 67 हजार किसान
जिले में करीब 67 हजार किसान खेती करते हैं। पीएम किसान सम्मान निधि योजना का फायदा करीब 32 हजार किसान ही उठा रहे हैं। ऐसे में ओलावृष्टि के नुकसान का आकलन पटवारी की रिपोर्ट, क्षतिपूर्ति पोर्टल व मेरी फसल-मेरा ब्योरा पर दर्ज डाटा का मिलान कर किया गया। उस दौरान मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 49,960 किसान अपनी फसलों का विवरण दर्ज कराए थे। इन किसानों का कुल बिजित रकबा 2,02,204 एकड़ क्षेत्र था।
- किसान संगठन मुआवजे की मांग के लिए दे रहे धरना : हरपाल
भाकियू जिला प्रधान हरपाल भांडवा का कहना है कि सरकार को प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा देना चाहिए। पिछले सीजन में नुकसान का मुआवजा भी आज तक नहीं मिला है। मुआवजा पूरा भी नहीं दिया जाता है। किसान समय-समय पर प्रकृति की मार से जूझ रहा है। अब सीएम का आश्वासन पूरा होने का इंतजार है।