समसपुर सीवरेट ट्रीटमेंट प्लाज (एसटीपी) तीन दिन बाद भी शुरू नहीं हो सका। जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा किसानों के खिलाफ पुलिस में शिकायत के बाद अब किसानों ने जनस्वास्थ्य विभाग पर जलभराव से फसलें खराब होने का आरोप लगाते हुए शिकायत दी है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों की मध्यस्थता न करने से सीवरेज समस्या विकराल होती जा रही है।
उल्लेखनीय है कि जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर में दो सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बना रखे हैं। इसमें से समसपुर एसटीपी ही शहर के 70 फीसदी सीवरेज पानी को ट्रीटमेंट करता है। जबकि बीते तीन दिनों से एसटीपी के पानी खेतों में भरने से नाराज आसपास के ग्रामीणों ने इस प्लांट को बंद कर बाहर धरना देना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने धरने के तीन दिन बीत जाने पर भी समस्या के समाधान के लिए प्रयास शुरू नहीं किए हैं।
किसानों ने सदर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि एसटीपी की देखरेख जेई मनोज रोहिल्ला करते हैं और उन्हें वो कई बार समस्या से अवगत करवा चुके हैं लेकिन उन्होंने एसटीपी की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने या दूषित पानी को स्टोर करने की व्यवस्था नहीं की। इसके चलते उनके खेतों में सीवर का दूषित और बदबूदार पानी पहुंच गया, जिससे फसल खराब हो गई। ग्रामीणों ने शिकायत में बताया कि विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों के खिलाफ थाने में जो शिकायत दी है वो सरासर गलत है। उनकी समस्या के समाधान की मांग को लेकर वो पिछले तीन दिनों से शांतिपूर्वक धरना दे रहे हैं।
जिला प्रशासन को करना होगा हस्तक्षेप
इस समय शहर के दोनों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़े हैं। इसके चलते सभी 21 वार्डों की सीवर लाइनों से दूषित पानी का उठान नहीं हो पा रहा। कई जगहों पर सीवर लाइनों ने बैक मारना शुरू कर दिया है। रामनगर एसटीपी की तो मुख्य लाइन डैमेज है और उसे दुरुस्त करने में समय लगेगा लेकिन समसपुर एसटीपी के जरिए सीवर लाइनों से दूषित पानी का उठान किया जा सकता है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण एसटीपी की मोटर नहीं चलाने दे रहे और इसके कारण समसपुर एसटीपी ठप पड़ा है। जल्द ही अगर जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप कर मामला नहीं सुलझाया तो पूरे शहर की सीवर लाइनें बैक मार जाएंगी।
क्या है एसटीपी विवाद
दिल्ली रोड पर समसपुर गांव के समीप जनस्वास्थ्य विभाग ने जो एसटीपी बना रखा है उसकी क्षमता अब कम पड़ रही है। यहां टैंकों की संख्या भी कम है जिसके चलते मौजूदा टैंकों से पानी ओवरफ्लो होकर खेतों में पहुंच रहा है। किसानों ने बताया कि 2008 से टैंक ओवरफ्लो कर रहे हैं और किसान भारी परेशान हैं। बार-बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। शुक्रवार दोपहर 12 बजे से किसान एसटीपी पर धरना दे रहे हैं और कर्मचारियों को सीवर लाइनों से पानी का उठान करने वाली मोटर नहीं चलाने दे रहे। किसानों का कहना है कि हाल ही में 35 एकड़ फसल की बिजाई की गई थी जो दूषित पानी के चलते बर्बाद हो गई।
मामले की जांच अभी शुरू नहीं कर पाई पुलिस
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ सदर थाना पुलिस को शिकायत सौंपी है। शनिवार को पुलिस ने जेई को एसटीपी पर बुलायाय था लेकिन एसएचओ के मौके पर पहुंचने के बावजूद जेई वहां नहीं पहुंचे और सदर थाना एसएचओ वापिस लौट आए। किसानों की शिकायत पर अभी पुलिस ने जांच शुरू नहीं की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले को दोनों पक्षों के बीच रजामंदी करवाकर सुलझवाने का प्रयास किया जा रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग के जेई के बाद अब किसानों ने भी पुलिस को शिकायत सौंप दी है। जेई को मैंने एसटीपी पर बुलाया था लेकिन वो वहां नहीं पहुंचे। दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच की जाएगी और उसके बाद ही अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-जितेंद्र सिंह, सदर थाना एसएचओ
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farmer protest- फोटो : CharkhiDadri