जिले के फार्मासिस्ट लगातार तीसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। दो दिन तक दवा वितरण बंद रहने के बाद बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था की। एसएमओ ने डिस्पेंशरी पर एमओ को तैनात किया और उनकी देखरेख में ही स्टाफ सदस्य ने काउंटर पर पहुंचने वाले मरीजों को दवाएं दी। हालांकि एक ही कर्मचारी के दवा वितरण करने से मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा। दवा काउंटर सुबह करीब दस बजे खोला गया और इससे पहले कुछ मरीज तो बिना दवा लिए ही लौट गए।
जिले के फार्मासिस्टों के हड़ताल पर रहने से पहले दो दिन दवा काउंटर बंद रहा। मरीजों को बिना दवा लिए ही अस्पताल से लौटना पड़ा। मंगलवार को परेशान मरीज ओपीडी पर्चियां लेकर धरने पर बैठे फार्मासिस्टों के बीच ही पहुंच गए थे। फार्मासिस्टों के हड़ताल पर होने का असर बुधवार को सिविल अस्पताल में तो ज्यादा नजर नहीं आया, लेकिन कुछेक ग्रामीण क्षेत्र के पीएचसी पर स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई रहीं। हालांकि दादरी के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीजों के दवा देने के लिए अस्पताल के डॉक्टर को चार्ज देकर स्थिति संभालने का प्रयास किया। इससे पहले दवा लेने आए मरीजों को अस्पताल से बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं। धरने पर बैठे फार्मासिस्टों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती, वे धरने पर डटे रहेंगे।
इस मौके पर अनिल शर्मा, लक्ष्मी नारायण, सनवीर फौगाट, वेदपाल, रविंद्र, संदीप कुमार, रितु, नीरज कुमारी व महेश कुमार आदि ने बताया कि फार्मासिस्ट वर्ग का विरोध बढ़ता जा रहा है। आने वाले कुछ दिनों में ही इमरजेंसी केस अटेंड करने में भी दिक्कतें आने लगेंगी। फार्मासिस्टों के हड़ताल पर होने से दवाएं समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं और अन्य काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
दो खिड़कियों से दी गईं दवाएं
दादरी सिविल अस्पताल में मरीजों की सहूलियत के लिए एसएमओ अनिता गुलिया ने एक चिकित्सक की ड्यूटी दवा काउंटर पर लगाई। वहां दो स्टाफ सदस्य बैठाए गए, जिन्होंने चिकित्सक की निगरानी में मरीजों को दवाएं दीं। महिलाओं और पुरुषों के लिए एक-एक खिड़की खोली गई।
ये हैं मुख्य मांगें
फार्मासिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि 4600 पे- ग्रेड पे की फाइल मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री की मंजूरी के बाद भी वित्त मंत्रालय में धूल फांक रही है। उस फाइल को जल्द से जल्द पास कर मांग पूरी की जाए। इसके अलावा ट्रेनिंग पर आए बीएमएस से दवा न बटवाकर फार्मासिस्टों की भर्ती की जाए।