डिस्पेंशनरी खुलने का इंतजार करते मरीज ।
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दूसरे दिन भी जिले अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात फार्मासिस्ट हड़ताल पर रहे। इसके चलते दवा वितरण का काम प्रभावित रहा। काफी इंतजार करने के बाद भी जब मरीजों को काउंटर से दवा नहीं मिल पाई तो परेशान होकर मरीज पर्चियां लेकर धरने पर बैठे फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पास जा पहुंचे। वहां बैठे फार्मासिस्ट से महिला मरीजों ने दवा देने की गुहार लगाई जो बेअसर रही। इसके बाद परेशान मरीजों ने वैकल्पिक व्यवस्था न होने पर रोष जाहिर किया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी से मिलने भी पहुंचे।
जिले के फार्मासिस्ट दूसरे दिन भी सामूहिक अवकाश पर रहने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रही। जिला अस्पताल के अलावा तीन सीएचसी और 14 पीएचसी में पहुंचने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सिविल अस्पताल में मरीजों की ओपीडी पर्ची पर चिकित्सक ने दवाएं तो लिख दीं लेकिन डिस्पेंशनरी बंद रहने से मिल नहीं पाई। सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी 450 से 500 के बीच रहती है। ज्यादातर मरीजों को दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ी।
वहीं, धरने पर बैठे फार्मासिस्टों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज करके उन्हें हड़ताल पर जाने को विवश किया है। पदाधिकारियों ने कहा कि फार्मासिस्ट अपना मान सम्मान लेकर रहेंगे। धरने पर मौजूद अनिल शर्मा, लक्ष्मीनारायण, सनवीर फौगाट, वेदपाल, रविंद्र, संदीप कुमार, रितु, नीरज कुमारी, महेश कुमार आदि ने बताया कि फार्मासिस्ट वर्ग का विरोध और आगे बढ़ता है तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं में परेशानी और बढ़ने वाली है। क्योंकि चीफ फार्मासिस्ट व फार्मासिस्ट द्वारा विभिन्न वार्ड व ऑपरेशन थिएटर, डिस्पेंशनरी, इमरजेंसी वार्ड में दवाएं, पट्टी, कॉटन व अन्य दवाएं खरीदकर उपलब्ध करवाते हैं। इसका स्टॉक तीन दिन तक रहता है जो अब खत्म होने को है।